आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में कड़े कानून ‘मीसा’ से जुड़ी टिप्पणियों के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा किए गए ‘‘जबड़े के इशारे’’ पर बृहस्पतिवार को अपनी चुप्पी तोड़ी और आपातकाल के दौरान जेल में अपने साथ हुई गंभीर शारीरिक ज्यादती को याद किया।
विजय द्वारा सरकरिया आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दशकों पुराने भ्रष्टाचार के आरोप उठाए जाने पर स्टालिन ने उनकी आलोचना की और इन आरोपों को ‘‘राजनीति से प्रेरित झूठ’’ करार दिया। उन्होंने कहा कि ये आरोप उन लोगों द्वारा फैलाए गए, जो पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के प्रति लंबे समय से नाराजगी रखते थे।
मीसा (आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम) के दौर के अपने इतिहास का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में स्वीकार किया कि मीसा के इतिहास को लेकर विजय की बात सही थी। उन्होंने आपातकाल के दौरान हुए दमन का जिक्र करते हुए बताया कि 31 जनवरी 1976 को करुणानिधि द्वारा मीसा कानून का विरोध किए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।