स्टालिन का संविधान में संशोधन का प्रस्ताव, कहा- संघवाद का संरचनात्मक पुनर्गठन जरूरी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 18-02-2026
Stalin proposes constitutional amendments, says structural restructuring of federalism is necessary
Stalin proposes constitutional amendments, says structural restructuring of federalism is necessary

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्र में संघवाद और राज्यों की स्वायत्तता को मजबूत करने के लिए संविधान में संशोधन का बुधवार को प्रस्ताव रखा और देश के संघवाद के ‘‘संरचनात्मक रूप से पुनर्गठन’’ का आह्वान किया।
 
तमिलनाडु विधानसभा में केंद्र-राज्य संबंधों पर न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति की रिपोर्ट का पहला भाग प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि संघवाद विश्वास और स्वायत्तता के बारे में है।
 
राज्य में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष स्टालिन ने कहा, ‘‘भारत के संघवाद को संरचनात्मक रूप से पुनर्व्यवस्थित करने की आवश्यकता है। यदि हम चाहें तो संविधान में पुनः संशोधन कर सकते हैं। सार्थक संघवाद नियंत्रण के बारे में नहीं बल्कि विश्वास, स्वायत्तता और लोगों की वास्तविकताओं के अनुरूप शासन के बारे में है।’’
 
उनके अनुसार, द्रमुक के संस्थापक एवं दिवंगत मुख्यमंत्री सी एन अन्नादुरई ने 1967 में कहा था कि भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने के लिए (भारत) संघ का वास्तव में पर्याप्त मजबूत होना आवश्यक है।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अन्नादुरई के उत्तराधिकारी दिवंगत एम. करुणानिधि ने ‘‘राज्यों के लिए स्वायत्तता और केंद्र में संघवाद’’ के सिद्धांत के माध्यम से इस दर्शन को आगे बढ़ाया और 1969 में न्यायमूर्ति पी.वी. राजमन्नार के नेतृत्व में केंद्र-राज्य संबंधों पर पहली स्वतंत्र समिति की स्थापना की।
 
स्टालिन ने कहा कि द्रमुक राज्यों में स्वायत्तता और केंद्र में संघवाद की नीति का पालन करता है।