Stalin proposed constitutional amendments, saying structural restructuring of federalism is necessary.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्र में संघवाद और राज्यों की स्वायत्तता को मजबूत करने के लिए संविधान में संशोधन का बुधवार को प्रस्ताव रखा और देश के संघवाद का ‘‘संरचनात्मक रूप से पुनर्गठन’’ किए जाने का आह्वान किया।
स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में केंद्र-राज्य संबंधों पर न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ समिति की रिपोर्ट का पहला भाग प्रस्तुत करते हुए कहा कि संघवाद विश्वास और स्वायत्तता पर आधारित होता है।
राज्य में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष स्टालिन ने कहा, ‘‘भारत के संघवाद को संरचनात्मक रूप से पुनर्व्यवस्थित करने की आवश्यकता है। यदि हम चाहें तो संविधान में पुनः संशोधन कर सकते हैं। सार्थक संघवाद नियंत्रण के बारे में नहीं बल्कि विश्वास, स्वायत्तता और लोगों की वास्तविकताओं के अनुरूप शासन के बारे में है।’’
उन्होंने कहा कि द्रमुक के संस्थापक एवं दिवंगत मुख्यमंत्री सी एन अन्नादुरई ने 1967 में कहा था कि भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने के लिए (भारत) संघ का वास्तव में पर्याप्त रूप से मजबूत होना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिवंगत मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने ‘‘राज्यों के लिए स्वायत्तता और केंद्र में संघवाद’’ के सिद्धांत के माध्यम से इस दर्शन को आगे बढ़ाया और 1969 में न्यायमूर्ति पी.वी. राजमन्नार के नेतृत्व में केंद्र-राज्य संबंधों पर पहली स्वतंत्र समिति की स्थापना की।
स्टालिन ने कहा कि द्रमुक राज्यों में स्वायत्तता और केंद्र में संघवाद की नीति का पालन करता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें अब भी केंद्र से अधिकार प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रही हैं और हर चीज के लिए केंद्र सरकार पर निर्भर हैं।