Stable repo rate will keep credit costs reliable, support credit flow: Bank official
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने और नीतिगत रुख को तटस्थ बनाए रखने के फैसले से कर्ज की लागत भरोसेमंद बनी रहेगी और ऋण प्रवाह एवं कारोबारी गतिविधियों को समर्थन मिलेगा। बैंकिंग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को यह संभावना जताई।
इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यह फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती में केंद्रीय बैंक के भरोसे को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक व्यापार नीतियों में बदलाव के बावजूद बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त पूंजी, बेहतर नकदी स्थिति और परिसंपत्तियों की गुणवत्ता वित्तीय प्रणाली की मजबूती को रेखांकित करती है।
श्रीवास्तव ने कहा कि इस फैसले से ग्राहकों और कंपनियों के लिए कर्ज की लागत भरोसेमंद बनी रहेगी तथा सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) सहित उत्पादक क्षेत्रों को ऋण उपलब्धता बनी रहेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘कर्ज पर ब्याज दरों को एक समान बनाने के प्रस्ताव और शहरी सहकारी बैंकों के लाइसेंस दोबारा शुरू करने से जुड़े मसौदा दिशानिर्देशों से वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।’’
आरबीआई ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए कर्ज पर ब्याज दरों से जुड़ी नियामकीय रूपरेखा को अधिक सरल, तर्कसंगत और सिद्धांत-आधारित बनाने का प्रस्ताव किया है। इसका उद्देश्य विभिन्न वित्तीय संस्थानों के बीच ब्याज दर निर्धारण के नियमों में एकरूपता लाना, पारदर्शिता बढ़ाना और ग्राहकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ बिनोद कुमार ने कहा कि आरबीआई द्वारा प्रमुख नीतिगत दरों को यथावत रखना बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप है और इससे आर्थिक वृद्धि की गति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किया जाना भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
कुमार ने कहा, ‘‘बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार नीतिगत फैसले लेने की आरबीआई की तत्परता सकारात्मक संकेत है। केंद्रीय बैंक आर्थिक हालात, महंगाई और वृद्धि दर को ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियों में आवश्यक बदलाव कर रहा है।’’
फेडरल बैंक के समूह अध्यक्ष एवं ट्रेजरी प्रमुख लक्ष्मणन वी. ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का सर्वसम्मति से रेपो दर को स्थिर रखने का फैसला भविष्य में ब्याज दरों को लेकर 'इंतजार करो और देखो' की नीति का संकेत देता है।
उन्होंने कहा, ‘‘आरबीआई की तटस्थ मौद्रिक नीति का रुख यह संकेत देता है कि भविष्य में ब्याज दरों की दिशा तय करने से पहले केंद्रीय बैंक वृद्धि दर और महंगाई के बीच संतुलन रखेगा। आने वाले समय में जिन प्रमुख जोखिमों पर ध्यान देना होगा, उनमें दक्षिण-पश्चिम मानसून, अल नीनो की स्थिति, भू-राजनीतिक जोखिम और वैश्विक व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चितताएं शामिल हैं।’’
बंधन समूह के प्रबंध निदेशक अरविंद अग्रवाल ने कहा कि रेपो दर को स्थिर रखने का फैसला मिश्रित वृहद-आर्थिक परिस्थितियों में आंकड़ों पर आधारित संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।