सेवा एहसान नहीं, कर्तव्य है: मोहन भागवत

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 23-03-2026
Service is not a favor, it is a duty: Mohan Bhagwat's statement in Nagpur.
Service is not a favor, it is a duty: Mohan Bhagwat's statement in Nagpur.

 

नागपुर

Rashtriya Swayamsevak Sangh (आरएसएस) प्रमुख Mohan Bhagwat ने कहा है कि ‘सेवा’ को कभी भी एहसान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे एक कर्तव्य के रूप में समझना जरूरी है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा मनुष्य के मन को शुद्ध करती है और उसे बेहतर इंसान बनाती है।

भागवत नागपुर में गंगाधरराव फडणवीस मेमोरियल डायग्नोस्टिक सेंटर के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह केंद्र महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis के दिवंगत पिता की स्मृति में स्थापित किया गया है।

अपने संबोधन में भागवत ने सेवा के वास्तविक अर्थ को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा, “हमारे यहां सेवा का अर्थ अलग है। यह कोई उपकार नहीं, बल्कि कर्तव्य है। जब हम सेवा करते हैं, तो हम अपने मन को शुद्ध करते हैं, क्योंकि मानव मन में कई प्रकार के विकार होते हैं। सेवा के माध्यम से हम अपने स्वार्थ को भूलकर दूसरों के लिए काम करते हैं, यही सच्ची सेवा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि समाज में कई बार सेवा के पीछे अलग-अलग प्रेरणाएं काम करती हैं। कुछ लोग चुनावी लाभ या निजी स्वार्थ के लिए सेवा करते नजर आते हैं, जो स्थायी नहीं होती। भागवत ने कहा कि चुनाव के समय बड़ी संख्या में लोग सेवा कार्यों में जुट जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने या जीत हासिल करने के बाद ऐसे लोग गायब हो जाते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि स्वार्थ, डर या मजबूरी के कारण की गई सेवा वास्तव में सेवा नहीं कही जा सकती। ऐसी सेवा का उद्देश्य दूसरों का भला नहीं, बल्कि व्यक्तिगत लाभ होता है और यह लंबे समय तक टिकाऊ भी नहीं होती।

इससे पहले, भागवत ने गुजरात के वडताल स्थित Swaminarayan Temple Vadtal में भी ‘संघ’ को लेकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय मानवीय नजरिए से समझने की जरूरत है।

भागवत के अनुसार, संघ समाज में सनातन धर्म के उत्थान की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसका उद्देश्य समाज को जोड़ना और सेवा के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाना है।