सेबी बॉन्ड कंपनियों के खुलासा नियमों में ढील पर करेगा समीक्षा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 26-05-2026
Sebi to review relaxation in disclosure norms for bond companies
Sebi to review relaxation in disclosure norms for bond companies

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 बाजार नियामक सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने मंगलवार को कहा कि ऋण-पत्र (बॉन्ड) जारी करने वाली कंपनियों के लिए खुलासा मानदंडों को शिथिल करने की जरूरत की समीक्षा की जाएगी, ताकि कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को अधिक व्यापक बनाया जा सके।
 
सेबी प्रमुख ने यहां केयरएज रेटिंग्स के एक कार्यक्रम में कहा कि यह देखा जाएगा कि सिर्फ ऋण-पत्र वाली सूचीबद्ध कंपनियों पर सूचीबद्धता दायित्व एवं खुलासा प्रावधान (एलओडीआर) के वही नियम लागू होने चाहिए या नहीं, जो इक्विटी सूचीबद्ध कंपनियों पर लागू होते हैं।
 
पांडेय ने यह भी कहा कि सेबी बॉन्ड को डिजिटल छोटे हिस्सों में बांटने की प्रक्रिया (टोकनकरण) पर एक पायलट शुरू करेगा, ताकि लेनदेन के निपटान में तेजी और पारदर्शिता की संभावना का परीक्षण किया जा सके। यह पायलट वितरित लेखा प्रौद्योगिकी पर आधारित होगा।
 
उन्होंने कहा कि बॉन्ड ब्रोकर के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) एक अलग नियामकीय वर्गीकरण पर भी विचार कर रहा है, जिससे लागत कम हो सके और इस क्षेत्र में भागीदारी बढ़े।
 
उन्होंने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बाद कॉरपोरेट बॉन्ड रेपो मंच शुरू करने के लिए शेयर बाजार तैयार हैं।
 
पांडेय ने कहा कि सेबी नगर निकाय बॉन्ड बाजार को भी विकसित करने के प्रयास कर रहा है। इसके तहत ढांचे की समीक्षा की जा रही है, ताकि शहरी ढांचागत परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाने और खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिल सके।
 
सेबी प्रमुख ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बकाया कॉरपोरेट बॉन्ड का आकार वित्त वर्ष 2014-15 के करीब 17.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 59 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जो सालाना 12 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्शाता है।