SC directs time-bound probe into alleged irregularities linked to Reliance Anil Ambani Group
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की समय-सीमा के भीतर, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करें। यह निर्देश कोर्ट ने 23 मार्च को EAS सरमा द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई करते हुए दिया। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा प्रस्तुत स्टेटस रिपोर्ट का संज्ञान लिया। ED ने कोर्ट को सूचित किया कि RAAG से जुड़े कई मामलों की जांच के लिए 12 फरवरी, 2026 को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। इस SIT में ED के वरिष्ठ अधिकारी, फोरेंसिक विश्लेषक और बैंकिंग संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
ED की रिपोर्ट के अनुसार, आठ मामलों में जांच शुरू हो चुकी है, और कई दस्तावेज़ पहले ही ज़ब्त किए जा चुके हैं। एजेंसी ने एक संदिग्ध "प्रोजेक्ट हेल्प" की ओर भी इशारा किया, जिसके तहत कथित तौर पर ऐसे ऋणदाताओं के माध्यम से दिवाला कार्यवाही शुरू की गई थी जिनका इस मामले से कोई संबंध नहीं था। एजेंसी ने आगे दावा किया कि लगभग 2,983 करोड़ रुपये के दावों का निपटारा मात्र 26 करोड़ रुपये में कर दिया गया, जिससे संभावित वित्तीय कदाचार की आशंकाएं पैदा हो गई हैं। CBI ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सात मामलों में सक्रिय रूप से जांच चल रही है, जिनमें हाल ही में दर्ज की गई पांच FIR भी शामिल हैं। एजेंसी ने बताया कि अकेले एक मामले में ही कथित तौर पर 2,223 करोड़ रुपये का गलत नुकसान हुआ है, और सभी मामलों को मिलाकर कुल दावों की राशि लगभग 73,006 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। एजेंसी सरकारी अधिकारियों की भूमिका और वित्तीय संस्थानों के साथ उनकी संभावित मिलीभगत की भी जांच कर रही है।
यह टिप्पणी करते हुए कि "प्रारंभिक तथ्य अपने आप में सब कुछ बयां करते हैं," कोर्ट ने किसी भी अनियमितता, अवैध कृत्य या मिलीभगत का पता लगाने के लिए दोनों एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इन आरोपों की मेरिट (गुण-दोष) पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को आश्वासन दिया कि जांच को चार सप्ताह के भीतर पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। कोर्ट ने सभी नियामक निकायों, वित्तीय संस्थानों और संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि वे ED के साथ पूरा सहयोग करें; साथ ही यह चेतावनी भी दी कि जांच में होने वाली किसी भी देरी या किसी भी प्रकार के प्रतिरोध की सूचना तत्काल कोर्ट को दी जानी चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल, 2026 को निर्धारित की गई है।