नई दिल्ली
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के शहादत दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम ने कहा कि आजाद ने “मां भारती को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया” और उनका बलिदान सदैव याद रखा जाएगा।
“आखिरी सांस तक लड़े” – अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भी आजाद को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन साहस, त्याग और अटूट देशभक्ति की गाथा है। शाह ने कहा कि आजाद ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अंतिम सांस तक ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष करते हुए संघर्ष किया। काकोरी ट्रेन एक्शन से लेकर क्रांतिकारी संगठन को मजबूत बनाने तक, उनका हर कदम स्वतंत्रता के उद्देश्य को समर्पित था।
क्रांति के अगुआ: एचएसआरए का पुनर्गठन
चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश में हुआ था। उनका वास्तविक नाम चंद्रशेखर सीताराम तिवारी था। वे कम उम्र से ही स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए थे और मात्र 15 वर्ष की आयु में असहयोग आंदोलन में भाग लिया।आजाद ने Hindustan Socialist Republican Association (HSRA) के पुनर्गठन में अहम भूमिका निभाई। संगठन के संस्थापक Ram Prasad Bismil को 1927 में फांसी दिए जाने के बाद आजाद ने नेतृत्व संभाला और क्रांतिकारी गतिविधियों को नई दिशा दी।
काकोरी कांड और साहसी कदम
अगस्त 1925 में शाहजहांपुर से लखनऊ जा रही ट्रेन की चेन खींचकर सरकारी खजाना लूटने की घटना, जिसे काकोरी कांड के नाम से जाना जाता है, में आजाद की अहम भूमिका थी। वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपने साहसिक अभियानों के लिए प्रसिद्ध रहे।
अल्फ्रेड पार्क में अंतिम संघर्ष
27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस मुठभेड़ के दौरान आजाद शहीद हो गए। उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए अंतिम गोली स्वयं को मार ली, ताकि वे अंग्रेजों के हाथ जिंदा न पकड़े जाएं।
उनका प्रसिद्ध नारा—“दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे”—आज भी देशभक्ति की प्रेरणा देता है।शहादत दिवस पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। नेताओं ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का जीवन आने वाली पीढ़ियों को साहस और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता रहेगा।





