एस. जयशंकर ने इथियोपिया के प्रधानमंत्री से की मुलाकात, मोदी का संदेश पहुंचाया

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 10-10-2026
S. Jaishankar met the Prime Minister of Ethiopia and conveyed Modi's message.
S. Jaishankar met the Prime Minister of Ethiopia and conveyed Modi's message.

 

अदीस अबाबा

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली से मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से व्यक्तिगत शुभकामनाएं दीं। इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और भारत-अफ्रीका सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि इथियोपिया के प्रधानमंत्री से मुलाकात करना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत शुभकामनाएं पहुंचाईं और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए अबी अहमद के दृष्टिकोण तथा मार्गदर्शन की सराहना की।

उन्होंने कहा कि साझा विकास लक्ष्यों और दक्षिण-दक्षिण एकजुटता के आधार पर हाल के वर्षों में भारत और इथियोपिया के द्विपक्षीय सहयोग में उल्लेखनीय तेजी आई है।

ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जयशंकर ने भारत और अफ्रीकी देशों से ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती से उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों का विकासशील देशों पर पड़ने वाला प्रभाव ऐसा मुद्दा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय नजरअंदाज नहीं कर सकता।

जयशंकर ने कहा कि यदि भारत और अफ्रीका मिलकर दुनिया में प्रभाव पैदा करना चाहते हैं, तो उन्हें सबसे पहले ग्लोबल साउथ की समस्याओं को स्पष्ट और मजबूती से सामने रखना होगा।

उन्होंने ईंधन, खाद्य पदार्थ, उर्वरक और वित्त से जुड़े संकटों को '4एफ संकट' के रूप में रेखांकित किया। उनके मुताबिक, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों और पिछले वर्षों में कोविड-19 महामारी ने विकासशील देशों की विकास संभावनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।

विदेश मंत्री ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों का इन घटनाओं से कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी उन्हें इनके दुष्परिणामों का सबसे अधिक बोझ उठाना पड़ रहा है।

उन्होंने भारत और अफ्रीकी देशों से इन चुनौतियों के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने तथा आपसी सहयोग मजबूत करने का आह्वान किया। जयशंकर ने कहा कि ग्लोबल साउथ को अपनी ताकत बढ़ाने के लिए आपस में भी सहयोग करना होगा।

संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग

जयशंकर ने कहा कि यदि भारत, अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के अन्य प्रमुख देश एकजुट होकर काम करें, तो संयुक्त राष्ट्र तथा सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा।

उन्होंने समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। उनके अनुसार, विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

विदेश मंत्री ने भारत की अध्यक्षता में जी-20 में अफ्रीकी संघ को शामिल किए जाने को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

भारत-अफ्रीका साझेदारी ऐतिहासिक और साझा हितों पर आधारित

जयशंकर ने अदीस अबाबा स्थित अदवा मेमोरियल म्यूजियम में आयोजित एक कार्यक्रम को भी संबोधित किया। यहां उन्होंने भारत-अफ्रीका साझेदारी को ऐतिहासिक संबंधों, साझा एकजुटता और समान अवसरों की आकांक्षा पर आधारित बताया।

उन्होंने कहा कि यह साझेदारी निष्पक्षता, प्रतिनिधित्व, अवसर और अपने भविष्य को स्वयं तय करने की स्वतंत्रता को बढ़ावा देती है।

जयशंकर ने भारत के '2047 तक विकसित भारत' के लक्ष्य और अफ्रीकी संघ के 'एजेंडा 2063' का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के लिए औद्योगीकरण बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि सस्ते सामान की भारी आमद या बाजार तक पहुंच सीमित करके विकासशील देशों की औद्योगीकरण की आकांक्षाओं को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

व्यापार, निवेश और तकनीक में सहयोग

विदेश मंत्री ने भारत और अफ्रीका के बीच विनिर्माण, दूरसंचार, दवा उद्योग, ऊर्जा, खनन, कृषि, बुनियादी ढांचे, वित्तीय सेवाओं और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता को लेकर दोनों पक्षों की साझा प्रतिबद्धता भविष्य की स्थायी साझेदारी का मजबूत आधार है।

विकास सहयोग पर बोलते हुए जयशंकर ने बताया कि भारत ने बिजली उत्पादन, विद्युत पारेषण, जल प्रबंधन, कृषि, रेलवे, स्वास्थ्य, विनिर्माण और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे सहित विभिन्न क्षेत्रों में 220 से अधिक परियोजनाओं को समर्थन दिया है।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने 70,000 से अधिक अफ्रीकी विद्यार्थियों और पेशेवरों को सहायता प्रदान की है।

डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य और कृषि में साझेदारी

जयशंकर ने डिजिटल गवर्नेंस के परिवर्तनकारी प्रभाव और अफ्रीकी देशों के साथ इंडिया स्टैक के बढ़ते सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को भारत-अफ्रीका सहयोग के नए क्षेत्र बताया।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत के योगदान का जिक्र करते हुए उन्होंने टीकों की सहायता, दवा उद्योग में निवेश और भाभाट्रॉन कैंसर उपचार मशीनें उपलब्ध कराने की पहल का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि भविष्य की साझेदारियों का उद्देश्य निर्भरता पैदा करना नहीं, बल्कि देशों की अपनी क्षमताओं को विकसित करना होना चाहिए।

कृषि उत्पादकता बढ़ाने, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों, मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण में सहयोग को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।

समुद्री सुरक्षा और शांति अभियानों में सहयोग

जयशंकर ने भारत और अफ्रीकी देशों के बीच सुरक्षा तथा समुद्री सहयोग के मजबूत होते संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने अफ्रीका में शांति अभियानों में भारत के योगदान को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप सुधारना आवश्यक है, ताकि विकासशील देशों को उचित स्थान और प्रतिनिधित्व मिल सके।

जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कंपाला में भी स्पष्ट किया था कि अफ्रीका भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में बना रहेगा।

तीन देशों की यात्रा पर हैं जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर गुरुवार को इथियोपिया पहुंचे थे। यह उनकी तीन देशों की अफ्रीकी यात्रा का हिस्सा है, जिसमें घाना और कोट डी आइवर के दौरे भी शामिल हैं।

इथियोपिया पहुंचने पर उन्होंने एक्स पर लिखा था कि अदीस अबाबा आकर उन्हें खुशी हुई है। उन्होंने गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए इथियोपिया के राज्य मंत्री बेरहानू त्सेगाये का आभार जताया और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए उपयोगी बैठकों की उम्मीद व्यक्त की।

इससे पहले कोट डी आइवर की यात्रा के दौरान भी जयशंकर ने अफ्रीकी देशों के साथ भारत की विकास साझेदारी का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि अफ्रीकी साझेदारों की जरूरतें और प्राथमिकताएं भारत के सहयोग दृष्टिकोण का मार्गदर्शन करती रही हैं।