नई दिल्ली
अगर आप बैंक में 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने की योजना बना रहे हैं, तो 1 अक्टूबर से आपके लिए नियमों में बदलाव होने जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए ढांचे के तहत बैंकों को बड़े यानी बल्क डिपॉजिट पर लागू ब्याज दरों को अपनी वेबसाइट पर पहले से सार्वजनिक करना होगा।
नए नियमों के मुताबिक, बैंकों को बल्क डिपॉजिट की लागू ब्याज दरें प्रत्येक कार्यदिवस सुबह 10 बजे तक अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होंगी। दरों में बदलाव की स्थिति में भी निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपडेट करना होगा। खास बात यह है कि जिस दर को बैंक ने पहले से घोषित किया है, उसी दर पर संबंधित जमा स्वीकार करनी होगी।
किन FD पर लागू होगा नियम?
निर्धारित व्यवस्था के तहत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों में सामान्यतः 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की टर्म डिपॉजिट को बल्क डिपॉजिट माना जाता है। ऐसे में बड़े निवेशकों को FD कराने से पहले बैंक की वेबसाइट पर उस दिन लागू ब्याज दर देखने का अवसर मिलेगा।
एक ही दिन स्वीकार की गई समान प्रकृति की जमाओं पर दरों में केवल इस आधार पर अंतर नहीं किया जा सकेगा कि ग्राहक ने अलग शाखा या माध्यम का इस्तेमाल किया है। इससे बड़े जमाकर्ताओं के लिए अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करना आसान हो सकता है।
क्या बैंक अलग-अलग ब्याज दर दे सकेंगे?
नए नियमों का अर्थ यह नहीं है कि बैंक हर बल्क FD पर केवल एक ही ब्याज दर लागू करेंगे। Liquidity Coverage Ratio (LCR) के तहत जमाओं की तरलता संबंधी विशेषताओं में अंतर होने पर बैंक अलग-अलग दरें पेश कर सकते हैं।
Rupyaapaisa.com के संस्थापक एवं एमडी मुकेश पांडे ने NDTV से बातचीत में कहा कि RBI का यह ढांचा बल्क FD की कीमत तय करने में पारदर्शिता और एकरूपता बढ़ाने में मदद कर सकता है। उनके मुताबिक, तरलता संबंधी विशेषताओं के आधार पर बैंकों के पास अलग-अलग दरें देने की गुंजाइश बनी रहेगी।
आम FD निवेशकों पर कितना असर?
ज्यादातर खुदरा FD निवेशकों पर इन बदलावों का तत्काल प्रभाव सीमित रहेगा। 1 लाख, 5 लाख या 25 लाख रुपये जैसी सामान्य राशि की FD कराने वाले ग्राहकों के लिए बल्क डिपॉजिट से जुड़े ये नए नियम सीधे तौर पर लागू नहीं होते।
हालांकि, बड़े निवेशकों के लिए 1 अक्टूबर से FD बुक करने से पहले बैंक की वेबसाइट पर प्रकाशित ब्याज दर की जांच करना महत्वपूर्ण होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, निवेशक उस दिन घोषित दर का रिकॉर्ड या स्क्रीनशॉट सुरक्षित रख सकते हैं और FD रसीद में दर्ज ब्याज दर से उसका मिलान कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, RBI की नई व्यवस्था का मुख्य फोकस बड़े जमाकर्ताओं के लिए ब्याज दरों की पहले से जानकारी और समान जमाओं के लिए अधिक पारदर्शी मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करना है।