अक्षय तृतीया पर होने वाली थी रोशनी की शादी, लेकिन एक फोन कॉल ने बदल दी उसकी ज़िंदगी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 05-08-2026
Roshni was supposed to get married on Akshaya Tritiya, but a phone call changed her life.
Roshni was supposed to get married on Akshaya Tritiya, but a phone call changed her life.

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन लोग नए काम शुरू करते हैं, खरीदारी करते हैं और शुभ कार्यों का आयोजन करते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले की 15 वर्षीय रोशनी (बदला हुआ नाम) के लिए यही दिन उसकी पढ़ाई और बचपन के खत्म होने का कारण बनने वाला था।
 
रोशनी के परिवार ने उसकी शादी अक्षय तृतीया के दिन तय कर दी थी। वह पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी। कुछ साल पहले उसके पिता का निधन हो चुका था और उसकी मां घरों में काम करके पूरे परिवार का पालन-पोषण कर रही थीं।
 
रोशनी ने अपनी मां से शादी कुछ महीनों के लिए टालने की गुजारिश की। लेकिन मां का कहना था कि अक्षय तृतीया बहुत शुभ दिन होता है और इस दिन शादी के लिए अलग से मुहूर्त निकलवाने या पंडित पर खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के लिए यह भी एक बचत थी।
 
मां की मजबूरी समझते हुए रोशनी चुप हो गई। उसे लगने लगा कि शायद अब उसकी किस्मत यही है।
 
एक फोन कॉल जिसने सब बदल दिया
 
शादी की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने Participatory Action for Community Empowerment (PACE) नामक संस्था को फोन कर इस बाल विवाह की सूचना दी।
 
PACE, Just Rights for Children के साथ मिलकर सीतापुर में बाल विवाह रोकने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करती है। संयोग से उसी दिन संस्था की टीम गांव में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान भी चला रही थी।
 
सूचना मिलते ही संस्था ने जिला प्रशासन, पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) से संपर्क किया। तुरंत एक संयुक्त टीम बनाई गई और रोशनी के घर पहुंचकर शादी रुकवा दी गई।
 
मां की मजबूरी भी समझी गई
 
जब अधिकारियों ने रोशनी की मां से बात की तो वह रोने लगीं। उन्होंने बताया कि परिवार की सारी जिम्मेदारी अकेले उन्हीं पर है। उन्हें लगा था कि बेटी की शादी हो जाने से एक सदस्य की जिम्मेदारी कम हो जाएगी और घर का खर्च कुछ आसान हो जाएगा।
 
PACE की निदेशक राजविंदर कौर के अनुसार, कई माता-पिता कानून और बाल विवाह के नुकसान से अनजान होते हैं। टीम ने रोशनी की मां को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी और समझाया कि बेटी की कम उम्र में शादी करना कानूनन अपराध है।
 
इसके बाद मां ने लिखित रूप से वादा किया कि वह अपनी बेटियों की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले नहीं करेंगी।
 
रोशनी का सपना फिर से जगा
 
जब अधिकारियों ने रोशनी से पूछा कि क्या वह दोबारा स्कूल जाना चाहती है, तो उसने तुरंत "हां" में सिर हिलाया।
 
पिता की मौत के बाद रोशनी और उसकी बहनों की पढ़ाई छूट गई थी। बाद में उसे बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया, ताकि उसके सभी अधिकार सुरक्षित रह सकें और वह फिर से अपनी पढ़ाई शुरू कर सके।
 
अक्षय तृतीया उसके लिए सच में शुभ साबित हुई
 
जिस दिन रोशनी की शादी होने वाली थी, उसी दिन उसकी जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया। उसके बचपन और भविष्य को एक फोन कॉल ने बचा लिया।
 
हालांकि, यह सिर्फ एक कहानी नहीं है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, भारत में 20 से 24 वर्ष की आयु की लगभग 23.3 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले हो चुकी थी। उत्तर प्रदेश के कई जिलों, खासकर सीतापुर में, आज भी लगभग हर चार में से एक लड़की की शादी 18 वर्ष से पहले कर दी जाती है।
 
अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसरों पर कई जगह आज भी बाल विवाह कराए जाते हैं। ऐसे में जागरूकता, कानून का पालन और समाज की भागीदारी ही बच्चों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी उम्मीद है।