Rann Samvad-2026: Air Force officers call for adopting multi-domain warfare system
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने आधुनिक युद्ध की तेजी से बदलती प्रकृति के बीच बहु-क्षेत्रीय अभियान (एमडीओ) प्रणाली अपनाने की तत्काल जरूरत पर शुक्रवार को जोर दिया।
बेंगलुरु में आयोजित दो दिवसीय ‘रण संवाद-2026’ संगोष्ठी के समापन के अवसर पर हुए विचार-विमर्श में पारंपरिक, साइबर, अंतरिक्ष और संज्ञानात्मक क्षेत्रों में फैले युद्धक्षेत्र के विस्तार और अभियानों की प्रभावशीलता एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षमताओं के निर्बाध एकीकरण की जरूरत को रेखांकित किया गया।
वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल नागेश कपूर ने कहा, ‘‘रण संवाद, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष के स्तर पर एकदम उचित समय पर की गई उपयुक्त पहल है।’’
उन्होंने भविष्य की सैन्य सोच को दिशा देने में इस मंच के महत्व को रेखांकित किया।
कपूर ने कहा कि इस संगोष्ठी का विषय मौजूदा रणनीतिक वास्तविकताओं के बिल्कुल अनुरूप है और यह तीनों सेनाओं के बीच सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर देता है।
उन्होंने कहा, ‘‘आज जो हम देख रहे हैं, उसके लिहाज से यह विषय पूरी तरह प्रासंगिक है। सभी को साथ आकर बहु-क्षेत्रीय अभियानों को सक्षम बनाना होगा और उन्हें अमल में लाना होगा।’’
कपूर ने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि आज संपन्न हो रही इस संगोष्ठी से हम कुछ बहुत महत्वपूर्ण निष्कर्ष लेकर आगे बढ़ेंगे। ये जरूरत पड़ने पर, भविष्य में किसी भी युद्ध की स्थिति में हमें एक अत्यंत प्रभावी रक्षा बल और मजबूत राष्ट्र के रूप में उभरने में मदद करेंगे।’’
एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए बहुक्षेत्रीय अभियानों को सैन्य रणनीति में ऐसा बड़ा बदलाव बताया जिसकी जरूरत प्रौद्योगिकी के स्तर पर प्रगति और संघर्ष के बदलते स्वरूप के कारण पड़ी है।
उन्होंने कहा, ‘‘बहुक्षेत्रीय अभियानों की अवधारणा एक नया प्रतिमान है जो मौजूदा युद्धक्षेत्र के अनुसार ढलने के लिए आवश्यक है। अंतरिक्ष, साइबर और संज्ञानात्मक जैसे गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में प्रगति के कारण युद्धक्षेत्र और विस्तृत हो गया है।’’
दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान के ‘एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ’ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध की रफ्तार और जटिलता तेज निर्णय लेने एवं समन्वित प्रतिक्रिया देने की मांग करती है।
उन्होंने कहा, ‘‘अब बहुत कम समय में कई अभियान विकल्प तैयार करना संभव हो गया है इसलिए उनका प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए हमें बहु-क्षेत्रीय अभियानों की अवधारणा की ओर बढ़ना होगा।’’ भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने आधुनिक युद्ध की तेजी से बदलती प्रकृति के बीच बहु-क्षेत्रीय अभियान (एमडीओ) प्रणाली अपनाने की तत्काल जरूरत पर शुक्रवार को जोर दिया।
बेंगलुरु में आयोजित दो दिवसीय ‘रण संवाद-2026’ संगोष्ठी के समापन के अवसर पर हुए विचार-विमर्श में पारंपरिक, साइबर, अंतरिक्ष और संज्ञानात्मक क्षेत्रों में फैले युद्धक्षेत्र के विस्तार और अभियानों की प्रभावशीलता एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्षमताओं के निर्बाध एकीकरण की जरूरत को रेखांकित किया गया।
वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल नागेश कपूर ने कहा, ‘‘रण संवाद, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष के स्तर पर एकदम उचित समय पर की गई उपयुक्त पहल है।’’
उन्होंने भविष्य की सैन्य सोच को दिशा देने में इस मंच के महत्व को रेखांकित किया।
कपूर ने कहा कि इस संगोष्ठी का विषय मौजूदा रणनीतिक वास्तविकताओं के बिल्कुल अनुरूप है और यह तीनों सेनाओं के बीच सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर देता है।
उन्होंने कहा, ‘‘आज जो हम देख रहे हैं, उसके लिहाज से यह विषय पूरी तरह प्रासंगिक है। सभी को साथ आकर बहु-क्षेत्रीय अभियानों को सक्षम बनाना होगा और उन्हें अमल में लाना होगा।’’
कपूर ने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि आज संपन्न हो रही इस संगोष्ठी से हम कुछ बहुत महत्वपूर्ण निष्कर्ष लेकर आगे बढ़ेंगे। ये जरूरत पड़ने पर, भविष्य में किसी भी युद्ध की स्थिति में हमें एक अत्यंत प्रभावी रक्षा बल और मजबूत राष्ट्र के रूप में उभरने में मदद करेंगे।’’
एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए बहुक्षेत्रीय अभियानों को सैन्य रणनीति में ऐसा बड़ा बदलाव बताया जिसकी जरूरत प्रौद्योगिकी के स्तर पर प्रगति और संघर्ष के बदलते स्वरूप के कारण पड़ी है।
उन्होंने कहा, ‘‘बहुक्षेत्रीय अभियानों की अवधारणा एक नया प्रतिमान है जो मौजूदा युद्धक्षेत्र के अनुसार ढलने के लिए आवश्यक है। अंतरिक्ष, साइबर और संज्ञानात्मक जैसे गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में प्रगति के कारण युद्धक्षेत्र और विस्तृत हो गया है।’’
दक्षिण-पश्चिमी वायु कमान के ‘एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ’ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध की रफ्तार और जटिलता तेज निर्णय लेने एवं समन्वित प्रतिक्रिया देने की मांग करती है।
उन्होंने कहा, ‘‘अब बहुत कम समय में कई अभियान विकल्प तैयार करना संभव हो गया है इसलिए उनका प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए हमें बहु-क्षेत्रीय अभियानों की अवधारणा की ओर बढ़ना होगा।’’