Ramsar site status for Glow Lake will boost biodiversity conservation: Chief Minister Khandu
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि लोहित जिले में स्थित ग्लॉ झील को अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले रामसर स्थल के तौर पर मान्यता मिलने से जैव-विविधता संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और स्थायी आजीविका को प्रोत्साहन मिलेगा।
खांडू ने कहा कि यह घोषणा राज्य के पारिस्थितिक संरक्षण के इतिहास में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का आभार व्यक्त किया।
यादव ने सोमवार को घोषणा की कि यह साफ पानी वाला जलाशय भारत का 101वां रामसर स्थल बन गया है।
खांडू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ग्लॉ झील को अरुणाचल प्रदेश की पहले रामसर स्थल का दर्जा मिलना हमारे राज्य के लिए गर्व की बात है। यह पहचान जैव-विविधता संरक्षण को मजबूत करेगी, स्थायी आजीविका को बढ़ावा देगी और आने वाली पीढ़ियों को हमारे अनमोल पारिस्थितिकी की रक्षा करने के लिए प्रेरित करेगी।’’
पूर्वी हिमालय में कामलांग बाघ रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित ‘ग्लॉ झील' घने और पुराने जंगलों के बीच में है।
पहाड़ों से साल भर बहने वाली धाराओं से झील में पानी आता है। इसके आस-पास का इलाका 150 से ज़्यादा तरह के पेड़ों और 49 तरह के ऑर्किड का निवास है, जो इसे पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं की विविधता के लिहाज से एक अहम केंद्र बनाता है।
रामसर संधि एक अंतर-सरकारी पर्यावरण संधि है। इसकी शुरुआत दो फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में दलदल, कच्छ-भूमि और झीलों जैसी आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए की गई थी।