नई दिल्ली।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी राज्यसभा चुनावों और कर्नाटक विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) ने रविवार को उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए मध्य प्रदेश और कर्नाटक से राज्यसभा के लिए अपने प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगा दी।
भाजपा ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए महेश केवट को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कर्नाटक से प्रोफेसर डॉ. एम. नागराजा को पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया गया है। इसके साथ ही कर्नाटक विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनावों के लिए लिंगराज पाटिल और रघु कौटिल्य को प्रत्याशी बनाया गया है।
उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही देशभर में राज्यसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। संसद के उच्च सदन के लिए चुनाव लड़ने वाले विभिन्न दलों के उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून है।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने 1 जून को 24 राज्यसभा सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनावों की अधिसूचना जारी की थी। इन सीटों के लिए मतदान 18 जून को होगा। चुनाव परिणाम उच्च सदन की राजनीतिक संरचना को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए विभिन्न दल इन चुनावों को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
इस बार जिन 24 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गुजरात की चार-चार सीटें शामिल हैं। इसके अलावा राजस्थान और मध्य प्रदेश की तीन-तीन सीटों पर चुनाव होगा। झारखंड की दो सीटों पर मतदान कराया जाएगा, जबकि अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और मेघालय की एक-एक सीट के लिए चुनाव होंगे।
इन द्विवार्षिक चुनावों के अलावा चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा में राज्यसभा की एक-एक सीट पर उपचुनाव की अधिसूचना भी जारी की है। इससे इन राज्यों में भी राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।
मध्य प्रदेश में भाजपा की ओर से राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और वरिष्ठ नेता रजनीश अग्रवाल ने भी राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन प्रक्रिया के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे। भाजपा नेतृत्व ने इस मौके पर चुनाव में बेहतर प्रदर्शन का भरोसा जताया।
राज्यसभा चुनावों को राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि उच्च सदन में दलों की संख्या और प्रभाव सीधे तौर पर संसद में विधायी प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है। भाजपा समेत सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने के लिए रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि कई राज्यों में विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या को देखते हुए अधिकांश सीटों पर परिणाम लगभग तय माने जा रहे हैं, लेकिन कुछ राज्यों में मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। ऐसे में 18 जून को होने वाला मतदान और उसके नतीजे राजनीतिक समीकरणों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल भाजपा द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा के साथ चुनावी प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है और अब सभी की नजरें नामांकन प्रक्रिया पूरी होने तथा मतदान के दिन पर टिकी हुई हैं।