Rajasthan government is committed to making higher education more employment-oriented: Chief Minister Sharma
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में नवाचार, तकनीक एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जिससे युवाओं का रोजगार प्राप्ति के साथ ही चरित्र निर्माण भी हो सके।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने तथा उसे और अधिक रोजगारपरक बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
शर्मा ने यहां 'अखिल भारतीय संस्थागत नेतृत्व समागम-2026' के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे युवाओं की ऊर्जा एवं क्षमताओं का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण में करने के लिए अपनी अहम भूमिका निभाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को ऐसी शिक्षा चाहिए, जो परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम हो तथा जहां वेदों के ज्ञान के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता की समझ हो, संस्कृत के श्लोकों के साथ कोडिंग की भाषा हो तथा योग और ध्यान के साथ रोबोटिक्स और नैनो प्रौद्योगिकी भी हो।
राज्य सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व का सबसे युवा देश है। युवाओं को सही शिक्षा, कौशल और मार्गदर्शन देकर इस ताकत का उपयोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को पाने के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘आज हमारे युवा स्टार्टअप, अनुसंधान, खेल, कला सहित विभिन्न क्षेत्रों में दुनिया में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। हमें उनकी रचनात्मकता को पंख देते हुए उनके सपनों को साकार करने के लिए मार्ग दिखाना है, जिससे वे वैश्विक नागरिक रहते हुए भी अपनी जड़ों से जुड़े रहें।’’
शर्मा ने कहा कि राजस्थान सरकार उच्च शिक्षा में डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने तथा अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर काम कर रही है तथा सरकार युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ रोजगार के भरपूर अवसर भी प्रदान कर रही है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार ने युवाओं के साथ धोखा किया था और पेपर लीक के अनेक प्रकरण हुए थे। लेकिन मौजूदा सरकार के कार्यकाल में 351 परीक्षाएं आयोजित की गई हैं तथा एक भी पेपर लीक नहीं हुआ।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि इस समागम का उद्देश्य है कि संस्थागत सहयोग, नेतृत्व विकास एवं नीति निर्माण के माध्यम से 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को गति मिले।