आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आदिवासियों के लिए वनवासी शब्द के इस्तेमाल को लेकर सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधा तथा दावा किया कि उन्होंने इस शब्द को इसलिए गढ़ा है, ताकि जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के मूल स्वामित्व को नकारा जा सके, जो सदियों से उन्हीं का है।
वडोदरा में आयोजित आदिवासी अधिकार संविधान सम्मेलन को संबोधित करते हुए गांधी ने जाति जनगणना की अपनी मांग को दोहराया, जिसे उन्होंने आदिवासियों के लिए देश की सत्ता और संपदा में अपना हिस्सा पाने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस समझौते के तहत कृषि क्षेत्र को उस देश के लिए खोल दिया गया है, ऐसा पहले किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया था।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘आदिवासी से तात्पर्य भारत के मूल निवासियों से है। यदि आप इस भूमि पर 1,000, 2,000 या यहां तक कि 5,000 वर्ष पहले भी आते, तो आप पाते कि जमीन का एक-एक इंच आदिवासियों के हाथों में था।’’
उन्होंने कहा “अब, 21वीं सदी में एक नया शब्द सामने आया है– आरएसएस और भाजपा द्वारा गढ़ा गया एक शब्द वनवासी। वनवासी शब्द का तात्पर्य है कि आप इस भूमि के मूल स्वामी नहीं थे। दूसरी ओर, आदिवासी शब्द का अर्थ है कि यह देश आपका था, इसका जल, जंगल और जमीन सही मायने में आपकी थी।”
गांधी ने कहा कि आदिवासियों को वनवासी कहना संविधान और पूज्य आदिवासी नेता बिरसा मुंडा पर हमला है। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘वनवासी शब्द का प्रयोग यह दर्शाता है कि आप मूल स्वामी नहीं थे- बल्कि मूल स्वामी कोई और था और जल, जंगल एवं जमीन आपकी नहीं थी; आप केवल संयोगवश वन में निवास करते थे।"