यूपीएससी परीक्षाओं में बड़ा बदलाव: अब हर अभ्यर्थी की होगी फेस ऑथेंटिकेशन से पहचान

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 11-01-2026
Major change in UPSC exams: Every candidate will now be identified through face authentication.
Major change in UPSC exams: Every candidate will now be identified through face authentication.

 

आवाज द वाॅयस /नई दिल्ली

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने अपनी परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। आयोग द्वारा आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं में अब परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरे की पहचान) अनिवार्य रूप से की जाएगी। यह नई व्यवस्था न केवल परीक्षा प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाएगी, बल्कि उम्मीदवारों के प्रवेश और सत्यापन की प्रक्रिया को भी अत्यंत तेज़ और सुव्यवस्थित करेगी।

यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी एक सूचना में स्पष्ट किया गया है कि आयोग द्वारा आयोजित प्रत्येक परीक्षा में सम्मिलित होने वाले सभी अभ्यर्थियों को परीक्षा स्थल पर चेहरे की पहचान आधारित प्रमाणीकरण से गुजरना होगा। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम परीक्षा प्रणाली की शुचिता बनाए रखने और किसी भी प्रकार की पहचान संबंधी गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की संभावना को समाप्त करने में अहम भूमिका निभाएगा।

गौरतलब है कि यूपीएससी देश की सबसे प्रतिष्ठित भर्ती संस्थाओं में से एक है, जो भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) सहित अनेक केंद्रीय सेवाओं के लिए परीक्षाएं आयोजित करती है। इन परीक्षाओं में हर वर्ष लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं, ऐसे में परीक्षा की पारदर्शिता और उम्मीदवारों की सही पहचान सुनिश्चित करना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

इसी उद्देश्य से यूपीएससी ने वर्ष 2025 में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का परीक्षण किया था। यह पायलट कार्यक्रम राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) एवं नौसेना अकादमी (एनए) द्वितीय परीक्षा 2025 तथा संयुक्त रक्षा सेवा (सीडीएस) द्वितीय परीक्षा 2025 के दौरान 14 सितंबर 2025 को आयोजित किया गया। इस तकनीक का प्रयोग गुरुग्राम के चुनिंदा परीक्षा केंद्रों पर किया गया, जहां उम्मीदवारों के चेहरे की तस्वीरों का डिजिटल मिलान उनके ऑनलाइन आवेदन पत्रों में अपलोड की गई तस्वीरों से किया गया।

इस पायलट परियोजना के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहे। यूपीएससी के अध्यक्ष अजय कुमार के अनुसार, नई प्रणाली के लागू होने से उम्मीदवारों के सत्यापन में लगने वाला समय औसतन घटकर मात्र 8 से 10 सेकंड प्रति उम्मीदवार रह गया। इससे न केवल परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश प्रक्रिया तेज़ हुई, बल्कि लंबी कतारों और अनावश्यक भीड़ की समस्या से भी काफी हद तक निजात मिली। साथ ही, यह तकनीक मानवीय त्रुटियों की संभावना को भी कम करती है और पूरी प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाती है।

फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली के माध्यम से अब किसी अन्य व्यक्ति के स्थान पर परीक्षा देने, फर्जी पहचान पत्र के उपयोग या किसी प्रकार की धोखाधड़ी की संभावनाएं लगभग समाप्त हो जाएंगी। यह तकनीक उम्मीदवार की वास्तविक पहचान को तुरंत सत्यापित कर लेती है, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर जनता और अभ्यर्थियों का विश्वास और भी मजबूत होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल और एआई आधारित तकनीकों को परीक्षा प्रणाली में शामिल करना समय की मांग है। यूपीएससी का यह कदम न केवल तकनीकी प्रगति का उदाहरण है, बल्कि यह अन्य परीक्षा संचालक संस्थाओं के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बनेगा। आने वाले समय में इस तरह की तकनीकों के व्यापक उपयोग से परीक्षा संचालन अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और अभ्यर्थी-अनुकूल बन सकेगा।

कुल मिलाकर, यूपीएससी द्वारा सभी परीक्षाओं में फेस ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य करने का निर्णय परीक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है। यह पहल न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाएगी, बल्कि योग्य और ईमानदार उम्मीदवारों को न्यायपूर्ण अवसर प्रदान करने की दिशा में भी एक मजबूत कदम सिद्ध होगी।