Premachandran took aim at PM Modi's appeal to reduce fuel consumption.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
लोकसभा सदस्य एन के प्रेमचंद्रन ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ईंधन के उपयोग पर स्वैच्छिक संयम बरतने की अपील को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि कई महीनों से जारी तेल संकट के बावजूद केंद्र सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए।
रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के नेता और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के सहयोगी प्रेमचंद्रन ने यहां संवाददाताओं से कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध कई महीने पहले शुरू हुआ था, लेकिन केंद्र सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया और न ही ईंधन संकट की संभावना पर कोई चर्चा की।
उन्होंने कहा, “ईंधन संकट पर विचार-विमर्श के बाद किसी पैकेज की घोषणा करने के बजाय इस मुद्दे को हल्के में लेना और बैठकों में कुछ टिप्पणियां करना दुर्भाग्यपूर्ण है। युद्ध शुरू हुए कई महीने हो चुके हैं, इसके बावजूद केंद्र सरकार ने ईंधन संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?”
उन्होंने कहा कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ सरकार को उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “ईंधन संकट का बोझ जनता पर डालने के बजाय, केंद्र सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए।”
प्रेमचंद्रन ने यह भी कहा कि लोगों को आंशिक लॉकडाउन में जाने के लिए कहना उचित नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तेलंगाना इकाई द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशी मुद्रा की बचत के लिए पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कारपूलिंग करने, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का उपयोग बढ़ाने, पार्सल ढुलाई के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने और घर से काम करने का सुझाव दिया।