ओवैसी का सवाल: अगर सड़क पर नमाज गलत है तो सभी धार्मिक जुलूसों पर भी लगे रोक

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 30-05-2026
Owaisi's Question: If offering Namaz on the road is wrong, then a ban should be imposed on all religious processions as well.
Owaisi's Question: If offering Namaz on the road is wrong, then a ban should be imposed on all religious processions as well.

 

हैदराबाद:

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने नमाज, अजान और धार्मिक आयोजनों को लेकर उठ रहे विवादों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईद मिलाप कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हर साल रमजान या बकरीद जैसे त्योहारों के दौरान मुसलमानों से जुड़े मुद्दों को जानबूझकर विवाद का विषय बनाया जाता है, जबकि अन्य धर्मों के आयोजनों पर उसी तरह की आपत्ति नहीं उठाई जाती।

ओवैसी ने कहा कि अजान और नमाज को लेकर लगातार सवाल खड़े किए जाते हैं, लेकिन देश में निकलने वाली विभिन्न धार्मिक यात्राओं और जुलूसों के दौरान सड़कों के उपयोग पर कोई चर्चा नहीं होती। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक अनेक धार्मिक यात्राओं में सड़कें बंद होती हैं, टेंट लगाए जाते हैं और यातायात प्रभावित होता है, लेकिन इन मामलों को सामान्य माना जाता है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सड़क पर नमाज पढ़ना गलत माना जाता है, तो यही नियम सभी धर्मों के सार्वजनिक आयोजनों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए। उनके अनुसार भारत में हर धर्म के त्योहार और जुलूस सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित होते हैं, इसलिए किसी एक समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है।

ओवैसी ने कहा कि मुसलमान नमाज नहीं छोड़ेंगे, चाहे कितनी भी आलोचना क्यों न हो। उन्होंने बताया कि हाल ही में कुछ किशोरों ने उनसे कहा कि टीवी चैनलों पर नमाज और अजान को लेकर होने वाली बहसें देखकर उन्होंने नियमित रूप से मस्जिद जाकर नमाज पढ़ना शुरू कर दिया है।

अपने भाषण में ओवैसी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 का भी उल्लेख किया, जो सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी धर्मों को अपने धार्मिक कर्तव्यों का पालन करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है और इसी भावना का सम्मान किया जाना चाहिए।

उन्होंने कथित दोहरे मापदंडों पर भी सवाल उठाए। ओवैसी ने कहा कि कुछ स्थानों पर हिंदू त्योहारों के दौरान अंडे, मांस और चिकन की दुकानों को बंद करने की मांग की जाती है। यदि ऐसा किया जा सकता है, तो रमजान के पूरे महीने शराब की दुकानों को भी बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नियम और प्रतिबंध सभी समुदायों के लिए समान होने चाहिए।

ओवैसी ने आरोप लगाया कि मुसलमानों के प्रति पूर्वाग्रह का माहौल बनाया जा रहा है और अजान, नमाज तथा खानपान जैसे मुद्दों को राजनीतिक बहस का केंद्र बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि देश के सामने महंगाई, शिक्षा और रोजगार जैसी गंभीर चुनौतियां हैं, लेकिन चर्चा का केंद्र बार-बार मुसलमानों को बना दिया जाता है।

अपने संबोधन में उन्होंने बढ़ती पेट्रोल और गैस कीमतों का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि आम जनता महंगाई से परेशान है, लेकिन इन मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होती। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह लोगों की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान दे।

भाषण के अंत में ओवैसी ने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती और इतिहास इस बात का गवाह है कि समय के साथ सबसे शक्तिशाली शासकों का दौर भी समाप्त हुआ है। उन्होंने सरकार से सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करने और संविधान की मूल भावना के अनुरूप शासन चलाने की अपील की।