आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
बिहार में 1.25 लाख से अधिक लोग बीड़ी और तंबाकू श्रमिक के रूप में पंजीकृत हैं, हालांकि उनकी वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
राज्य सरकार ने बुधवार को विधानसभा में यह जानकारी देते हुए कहा कि इन श्रमिकों के कल्याण, दुर्घटना या विकलांगता की स्थिति में मुआवजे सहित अन्य विषयों को लेकर सरकार लगातार चिंतित है।
श्रम संसाधन मंत्री संजय सिंह ‘टाइगर’ ने बताया, ‘‘भारत सरकार के ‘ई-श्रम पोर्टल’ के अनुसार कुल 1,25,453 लोगों ने खुद को तंबाकू श्रमिक के रूप में पंजीकृत कराया है। इनमें से लगभग 61,500 जमुई में, 4,947 नालंदा में, 194 सहरसा में और 203 खगड़िया जिले में हैं। हालांकि उनकी वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।’’
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अक्टूबर 2025 से बीड़ी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी 444 रुपये प्रतिदिन निर्धारित की है।
मंत्री ने कहा, ‘‘जो नियोक्ता और ठेकेदार न्यूनतम मजदूरी नहीं देते, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। जमुई जिले के पांच नियोक्ताओं के खिलाफ न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के तहत मुंगेर स्थित सहायक श्रम आयुक्त की अदालत में दावा आवेदन दायर किया गया। इस प्रक्रिया में कुल आठ बीड़ी श्रमिकों को उनका बकाया वेतन दिलाया गया।’’
संजय सिंह सहरसा के विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता के अल्पसूचित प्रश्न का जवाब दे रहे थे। गुप्ता ने बीड़ी श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान किए जाने का मुद्दा उठाया था।
गुप्ता ने दावा किया कि श्रमिकों को 1,000 बीड़ी बनाने पर मात्र 100 रुपये दिए जा रहे हैं, जिसके कारण आठ से 10 घंटे कड़ी मेहनत के बावजूद उन्हें रोजाना सिर्फ 150 से 200 रुपये ही मिल पाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केवल चार जिलों - जमुई, सहरसा, नालंदा और खगड़िया - में ही 16 लाख से अधिक बीड़ी श्रमिक हैं।