ऑपरेशन सिंदूर: जब दुनिया देखती रही और आतंक के खिलाफ भारत ने बदली रणनीतिक तस्वीर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 07-05-2026
Operation Sindoor: When the World Watched On as India Transformed the Strategic Landscape Against Terror
Operation Sindoor: When the World Watched On as India Transformed the Strategic Landscape Against Terror

 

नई दिल्ली

भारत आज Operation Sindoor की पहली वर्षगांठ मना रहा है। मई 2025 में शुरू हुआ यह 96 घंटे का सैन्य अभियान केवल एक जवाबी कार्रवाई नहीं था, बल्कि भारत की नई रणनीतिक सोच और आतंकवाद के खिलाफ कठोर नीति का वैश्विक प्रदर्शन बन गया। इस ऑपरेशन ने न सिर्फ सीमापार आतंकी ढांचे को गहरा नुकसान पहुंचाया, बल्कि दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति को भी नई दिशा दी।

इस अभियान की शुरुआत 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई थी, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी। भारत ने इस हमले को “बर्बर आतंकी कृत्य” बताते हुए जवाबी कार्रवाई का फैसला लिया। इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें Jaish-e-Mohammed का बहावलपुर स्थित केंद्र और Lashkar-e-Taiba का मुरीदके स्थित ठिकाना भी शामिल था।

भारत की इस कार्रवाई की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसे बेहद सटीक और सीमित सैन्य लक्ष्य के साथ अंजाम दिया गया। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के समन्वित अभियान ने यह संदेश दिया कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की कार्रवाई को अपेक्षाकृत शांत प्रतिक्रिया मिली। Donald Trump ने उस समय कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से तनाव चला आ रहा है और “लोगों को पहले से अंदेशा था कि कुछ होने वाला है।” वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी उम्मीद जताई थी कि हालात जल्द सामान्य होंगे।

इज़राइल के राजदूत Reuven Azar ने भारत की कार्रवाई का खुलकर समर्थन करते हुए कहा था कि आतंकियों के लिए कहीं भी सुरक्षित ठिकाना नहीं होना चाहिए। दूसरी ओर, China ने प्रतिक्रिया को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की, लेकिन उसका बयान पहले की तुलना में काफी संतुलित माना गया।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव Antonio Guterres ने सैन्य संयम की अपील की, जबकि रूस, जापान और संयुक्त अरब अमीरात ने भी संवाद और स्थिरता पर जोर दिया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान को वह वैश्विक समर्थन नहीं मिल सका जिसकी उसे उम्मीद थी।

भारत ने इस दौरान वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कई देशों के राजनयिकों को स्थिति की जानकारी दी, जिससे भारत को एक जिम्मेदार और आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ राष्ट्र के रूप में देखा गया।

सैन्य स्तर पर यह अभियान आत्मनिर्भर भारत की रक्षा क्षमता का भी प्रदर्शन था। Akash Missile System, BrahMos, HAL Tejas और अन्य स्वदेशी रक्षा प्रणालियों ने इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और यूसीएवी हमलों की कोशिशों को भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली ने नाकाम कर दिया।

भारतीय नौसेना ने भी समुद्री क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त बनाए रखी और पाकिस्तान की गतिविधियों को सीमित कर दिया। वहीं सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने सांबा सेक्टर में घुसपैठ की कोशिशों को विफल कर यह दिखाया कि भारत की सुरक्षा व्यवस्था सीमा से लेकर आंतरिक क्षेत्रों तक मजबूत है।

आज, ऑपरेशन सिंदूर को भारत की सैन्य और रणनीतिक नीति में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि युद्धविराम स्थायी समाधान नहीं, बल्कि केवल अस्थायी विराम है। यदि भविष्य में फिर किसी आतंकी हमले की कोशिश हुई, तो भारत पहले से अधिक कठोर प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहेगा।