आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पिछले साल सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के बाद से एक साल के भीतर, सैन्य अधिकारियों ने इसकी जटिलताओं का वर्णन करने के लिए कई उपमाओं का इस्तेमाल किया है - दुश्मन की अगली चाल के बारे में अनिश्चितता को दर्शाने के लिए ‘‘शतरंज का खेल’’ से लेकर भारत की जीत की विशालता को उजागर करने के लिए ‘‘पारियों की हार’’ तक।
इस सैन्य कार्रवाई में शुरुआत से ही प्रतीकात्मकता अंतर्निहित थी। इसके नाम के साथ-साथ अब व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले ‘लोगो’ से भी एक स्पष्ट संदेश मिलता है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कई आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।
ऑपरेशन शुरू करने के बाद, भारतीय सेना ने 7 मई को रात 1:51 बजे ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था, ‘‘#पहलगाम आतंकवादी हमला न्याय मिल गया! जय हिंद!’’
इसके साथ ही एक डिजिटल पोस्टर भी था जिस पर गहरे रंग की पृष्ठभूमि में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लिखा था। ‘सिंदूर’ शब्द के एक ‘ओ’ को सिंदूर से भरे कटोरे के साथ दर्शाया गया था।
बाद में, पाकिस्तान ने भी भारत के खिलाफ हमले शुरू किए और भारत द्वारा किए गए सभी जवाबी हमले भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत ही किए गए।
परमाणु हथियारों से लैस दोनों पड़ोसी देशों के बीच लगभग 88 घंटे तक चला सैन्य संघर्ष 10 मई की शाम उनके बीच एक सहमति पर पहुंचने के बाद रुक गया।
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान द्वारा संघर्ष के बारे में भारत के आकलन को समझाने के लिए खेल की उपमा का उपयोग किए जाने से लेकर थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी द्वारा सशस्त्र बलों की एकीकृत कार्रवाई को दर्शाने के लिए एक संगीत ऑर्केस्ट्रा का संदर्भ दिए जाने तक, पिछले कई महीनों में लगभग चार दिनों के संघर्ष का संदर्भ अनेक छवियों, विमर्श और भावनाओं के साथ दिया जाता रहा है।