आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने ओडिशा में पिछली बीजू जनता दल (बीजद) सरकार के ‘5टी हाई स्कूल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम’ (एचएचटीपी) को लागू करने में कई वित्तीय अनियमितताओं और कमियों की ओर इशारा किया है।
बीजद सरकार के स्कूल और जन शिक्षा विभाग (एसएमई) ने 2021 में यह कार्यक्रम शुरू किया था ताकि स्कूलों की अवसंरचना को बदला जा सके और उन्हें सीखने के लिए बेहतर जगह बनाया जा सके।
इस कार्यक्रम को ‘मो स्कूल अभियान परिचालन संगठन’ (एमएसएपीएस), ‘ओडिशा विद्यालय शिक्षा कार्यक्रम प्राधिकरण’ (ओएसईपीए) और जिला कलेक्टरों ने लागू किया था।
सीएजी ने छह जिलों - बालासोर, कटक, गंजाम, जाजपुर, क्योंझर और सुंदरगढ़ - में इस कार्यक्रम के रिकॉर्ड का लेखा परीक्षण किया और अपनी हालिया रिपोर्ट में इसके नतीजे बताए।
लेखा परीक्षण के दौरान, सीएजी ने गंभीर अनियमितताएं पाईं जिनमें कार्यक्रम की निधि का संदिग्ध दुरुपयोग, धोखाधड़ी से किए गए भुगतान और दिशानिर्देशों का पालन किए बिना की गई खरीद-फरोख्त जैसी बातें शामिल थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, एचएसटीपी निधि से 57.95 लाख रुपये बडाचना महिला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पर खर्च किए गए जो एक निजी शिक्षण संस्थान था और एचएसटीपी के तहत सहायता पाने का पात्र नहीं था।
लेखा परीक्षक को कटक के रानीहाट हाई स्कूल में 12.48 लाख रुपये और जाजपुर जिले के दशरथपुर प्रखंड के नंदीपुर हाई स्कूल में 30 लाख रुपये के एचएसटीपी और ‘मो स्कूल अभियान’ निधि के गलत इस्तेमाल का भी शक है।
सीएजी ने जलेश्वर प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) द्वारा डेस्क की मरम्मत का झूठा दावा करके किए गए 4.95 लाख रुपये के धोखाधड़ी वाले भुगतान का भी पता लगाया।