Now even large funds can bid for highway projects.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
सरकार ने निजी निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से बड़े कोषों और संस्थागत निवेशकों को ‘बीओटी’ (बनाओ-चलाओ-सौंप दो) मॉडल की राजमार्ग परियोजनाओं में बोली लगाने की अनुमति दे दी है।
बीओटी मॉडल के तहत सरकार परियोजना के वित्तपोषण, निर्माण और संचालन के लिए 20-30 वर्ष की रियायत अवधि प्रदान करती है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से जारी संशोधित अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) दस्तावेज के मुताबिक, अब सरकारी संपत्ति कोष, अवसंरचना कोष, पेंशन कोष और निजी इक्विटी निवेशक सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत बीओटी परियोजनाओं में भाग ले सकेंगे।
इससे पहले ऐसे निवेशकों को केवल ‘टोल संग्रह-परिचालन-हस्तांतरण’ (टीओटी) मॉडल वाली परियोजनाओं में ही बोली लगाने की अनुमति थी।
देश में राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास बीओटी (टोल), बीओटी (एन्यूटी), इंजीनियरिंग-खरीद-निर्माण (ईपीसी), इनविट और हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) जैसे विभिन्न तरीकों से किया जाता है।
इसके साथ ही मंत्रालय ने निवेश मानदंडों में भी ढील दी है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब लगभग 22,000 करोड़ रुपये की चार राजमार्ग परियोजनाओं में अनुबंध शर्तों को लेकर चिंताओं के चलते निजी कंपनियों ने बोली लगाने में रुचि नहीं दिखाई थी।
आरएफपी दस्तावेज के मुताबिक, राजमार्ग परियोजना के बोलीदाता में व्यक्तिगत निवेशक, निजी या सरकारी इकाई, वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ), विदेशी निवेश कोष या इनका समूह शामिल हो सकता है, जो संयुक्त बोली समझौते के तहत एक गठबंधन बना सकते हैं।
संशोधित प्रावधानों के तहत संस्थागत निवेशकों का मूल्यांकन उनकी वित्तीय क्षमता के आधार पर किया जाएगा, जबकि निर्माण संबंधी तकनीकी योग्यता परियोजना आवंटन के बाद निर्माण या इंजीनियरिंग साझेदारों के माध्यम से पूरी की जा सकेगी।
बीओटी मॉडल के तहत सरकार परियोजना के वित्तपोषण, निर्माण और संचालन के लिए 20-30 वर्ष की रियायत अवधि प्रदान करती है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से जारी संशोधित अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) दस्तावेज के मुताबिक, अब सरकारी संपत्ति कोष, अवसंरचना कोष, पेंशन कोष और निजी इक्विटी निवेशक सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत बीओटी परियोजनाओं में भाग ले सकेंगे।
इससे पहले ऐसे निवेशकों को केवल ‘टोल संग्रह-परिचालन-हस्तांतरण’ (टीओटी) मॉडल वाली परियोजनाओं में ही बोली लगाने की अनुमति थी।
देश में राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास बीओटी (टोल), बीओटी (एन्यूटी), इंजीनियरिंग-खरीद-निर्माण (ईपीसी), इनविट और हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) जैसे विभिन्न तरीकों से किया जाता है।
इसके साथ ही मंत्रालय ने निवेश मानदंडों में भी ढील दी है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब लगभग 22,000 करोड़ रुपये की चार राजमार्ग परियोजनाओं में अनुबंध शर्तों को लेकर चिंताओं के चलते निजी कंपनियों ने बोली लगाने में रुचि नहीं दिखाई थी।
आरएफपी दस्तावेज के मुताबिक, राजमार्ग परियोजना के बोलीदाता में व्यक्तिगत निवेशक, निजी या सरकारी इकाई, वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ), विदेशी निवेश कोष या इनका समूह शामिल हो सकता है, जो संयुक्त बोली समझौते के तहत एक गठबंधन बना सकते हैं।
संशोधित प्रावधानों के तहत संस्थागत निवेशकों का मूल्यांकन उनकी वित्तीय क्षमता के आधार पर किया जाएगा, जबकि निर्माण संबंधी तकनीकी योग्यता परियोजना आवंटन के बाद निर्माण या इंजीनियरिंग साझेदारों के माध्यम से पूरी की जा सकेगी।