मणिपुर में हिंसा प्रभावित परिवारों को पुनर्वास लाभ न मिलने के दावों की जांच करे समिति : न्यायालय

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 10-08-2026
 non-rehabilitation benefits to violence-affected families in Manipur: Court
non-rehabilitation benefits to violence-affected families in Manipur: Court

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को अपनी बनाई एक समिति से उन दावों की जांच करने को कहा, जिनके मुताबिक 2023 में मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से प्रभावित करीब 24,000 परिवारों को अब तक सरकारी पुनर्वास और कल्याण योजनाओं का लाभ नहीं मिला है।
 
न्यायालय ने मणिपुर और असम सरकारों तथा अन्य लोगों से यह भी कहा कि वे हिंसा से जुड़े केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के मामलों की सुनवाई के लिए अलग-अलग दो विशेष अधीनस्थ अदालत बनाने पर विचार करें।
 
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्वेस समेत कई वकीलों की दलीलों पर ध्यान दिया, जिनमें कहा गया था कि प्रभावित कई आदिवासियों को अब तक पुनर्वास और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला है।
 
पीठ उन लोगों के पुनर्वास के मामले की सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने हिंसा के दौरान अपने घर और आजीविका के साधन खो दिए थे।
 
न्यायालय ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का संज्ञान लिया। इसने देखा कि पहचान किए गए लगभग 7,000 लाभार्थियों में से 4,000 से ज्यादा लाभार्थियों को उनके घरों के पुनर्निर्माण के लिए धनराशि जारी की गई है।
 
शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकारी योजना के तहत कच्चे घर के लिए पांच लाख रुपये और अर्द्ध-पक्के या पक्के घर के लिए सात लाख रुपये दिए जाते हैं।
 
पीठ ने न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्त मखीजा की दलीलों पर ध्यान देते हुए कहा कि हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत अब तक 12,000 से ज्यादा घरों को मंजूरी दी जा चुकी है।
 
पीठ ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि अस्थायी आश्रय गृह बनाए गए हैं और पक्के घरों के लिए 885 चिह्नित लाभार्थियों को 51.95 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
 
इसके अलावा, जिन परिवारों के घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए थे, उन्हें प्रति परिवार एक लाख रुपये दिए गए हैं।