आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
तेल समृद्ध फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ने वाले एकमात्र समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए किसी भी देश की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने मंगलवार को यह बात कही।
फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों को ईरान के साथ किसी तरह के समझौते पर पहुंचने के बाद ही जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दिए जाने की चर्चाओं को खारिज करते हुए, बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि जलडमरूमध्य से आवागमन पोत परिवहन कंपनियों और उनकी अनुबंधित इकाइयों द्वारा सुरक्षा और अन्य स्थितियों पर विचार करने के बाद किया जाता है।
ईरान पर अमेरिकी और इजरायल के हमलों और उसकी जवाबी कार्रवाई के कारण जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई थी।
सिंह ने कहा, ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं है।’’
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय नौवहन नियमों के अनुसार जलडमरूमध्य में आवागमन की स्वतंत्रता है। चूंकि जलडमरूमध्य संकरा है, केवल प्रवेश और निकासी मार्ग चिन्हित हैं, जिनका पालन सभी जहाजों को करना आवश्यक है।
एलपीजी टैंकर पाइन गैस और जग वसंत जलडमरूमध्य को पार करने से पहले सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए। दोनों एक-दूसरे के करीब चल रहे हैं। इन जहाजों पर लदी गैस देश में लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर है। जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने से जुड़े आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
हाल ही में दो और भारतीय ध्वज वाले एलपीजी जहाज युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। ये जहाज लगभग एक दिन का देश का गैस भंडार लेकर आ रहे हैं। पाइन गैस जहाज में 45,000 टन एलपीजी है और यह 27 मार्च को न्यू मंगलौर बंदरगाह पहुंचने वाला है।
जग वसंत जहाज में 47,612 टन एलपीजी है और यह 26 मार्च को गुजरात के कांडला पहुंचेगा।
इन दोनों जहाजों में क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविक सवार हैं।