धर्मेंद्र प्रधान की बर्खास्तगी तक चर्चा नहीं: राहुल गांधी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 24-07-2026
No discussion until Dharmendra Pradhan is dismissed: Rahul Gandhi
No discussion until Dharmendra Pradhan is dismissed: Rahul Gandhi

 

नई दिल्ली।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से नहीं हटाया जाता, तब तक विपक्ष संसद में किसी भी तरह की चर्चा या संवाद में हिस्सा नहीं लेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नीट (NEET) प्रश्नपत्र लीक मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उससे जुड़े मुद्दों से बचने की कोशिश कर रही है।

संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि नीट परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक और उससे जुड़े विवाद ने देश के लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। उनका कहना था कि विपक्ष लगातार छात्रों की आवाज़ को संसद के भीतर और बाहर उठाता रहा है और आगे भी इस मुद्दे को मजबूती से उठाता रहेगा।

राहुल गांधी ने कहा कि इस पूरे मामले में छात्रों की तीन प्रमुख मांगें हैं और कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष इन्हीं मांगों के समर्थन में खड़ा है। उन्होंने कहा कि पहली मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, क्योंकि विपक्ष के अनुसार इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी उनकी है। दूसरी मांग यह है कि छात्रों पर कथित रूप से बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। तीसरी मांग यह है कि प्रधानमंत्री छात्रों से माफी मांगें, क्योंकि इस विवाद ने लाखों अभ्यर्थियों के भरोसे को झटका पहुंचाया है।

कांग्रेस नेता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री को बर्खास्त नहीं किया जाता, तब तक विपक्ष सरकार के साथ किसी भी प्रकार का संवाद या चर्चा नहीं करेगा। उनके अनुसार यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश के युवाओं और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।

राहुल गांधी ने संसद की कार्यवाही को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें लोकसभा में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। उनका कहना था कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने सदन में उनका नाम लेते हुए विपक्ष से चर्चा में शामिल होने की अपील की थी, लेकिन जब उन्होंने इसका जवाब देने की कोशिश की तो उन्हें बोलने की अनुमति नहीं मिली।

उन्होंने कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार यदि किसी सदस्य का नाम सदन में लिया जाता है, तो उसे अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस स्थापित संसदीय परंपरा का पालन नहीं किया गया और विपक्ष की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया गया।

नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर संसद के भीतर और बाहर लगातार राजनीतिक टकराव बना हुआ है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति पर कायम है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद संसद के आगामी सत्रों में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है। शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा की विश्वसनीयता और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और अधिक तीखी हो सकती है।