आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मौजूदा वित्त वर्ष में पिछड़ा वर्ग समुदायों के लिए स्वीकृत अधिकांश सामुदायिक भवनों और छात्रावासों का आवंटन कथित तौर पर कुरुबा समुदाय से संबद्ध संगठनों और ट्रस्ट को किए जाने की खबरों के बीच स्पष्ट किया है कि किसी भी समुदाय के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया।
सिद्धरमैया भी करुबा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।
उन्होंने कहा कि अन्य समुदायों से प्राप्त प्रस्तावों की भी समीक्षा की जा रही है और भविष्य में उन्हें भी वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि कुरुबा समुदाय को अधिक आवंटन मुख्यतः इसलिए मिला क्योंकि उस समुदाय के संगठनों ने अधिक संख्या में आवेदन प्रस्तुत किए थे।
हालिया आदेश का हवाला देते हुए कुछ खबरों में कहा गया कि पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने स्वीकृत 155 सामुदायिक भवनों और छात्रावासों में से 80 कुरुबा समुदाय को आवंटित किए हैं।
सिद्धरमैया ने 28 मई को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और बताया जाता है कि ये मंजूरियां उनके कार्यकाल के दौरान दी गई थीं।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने विभिन्न पिछड़े समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों और समूहों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों की समीक्षा की और लगभग 71.85 करोड़ रुपये की लागत से करीब 155 पिछड़ा वर्ग संगठनों के लिए सामुदायिक भवनों और छात्रावासों के निर्माण को प्रारंभिक स्वीकृति प्रदान की।’’
उन्होंने यह भी कहा कि यह लाभार्थियों की अंतिम सूची नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘अन्य पिछड़े समुदायों द्वारा पेश प्रस्तावों की भी जांच की जा रही है और भविष्य में उन्हें भी धनराशि जारी की जाएगी।’’