पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट कल्पसर को नई रफ्तार

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 18-05-2026
New Momentum for PM Modi's Dream Project, Kalpasar
New Momentum for PM Modi's Dream Project, Kalpasar

 

गांधीनगर

गुजरात के बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी कल्पसर प्रोजेक्ट को अब नई गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया नीदरलैंड यात्रा के दौरान इस परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। नीदरलैंड के विश्व प्रसिद्ध जल प्रबंधन ढांचे ‘अफ्सलाउटडाइक’ का निरीक्षण करने के बाद भारत और नीदरलैंड के बीच तकनीकी सहयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण सहमति बनी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री के साथ अफ्सलाउटडाइक बांध का दौरा किया। यह बांध दुनिया के सबसे सफल जल प्रबंधन मॉडलों में गिना जाता है। गुजरात के कल्पसर प्रोजेक्ट और इस डच परियोजना के बीच कई तकनीकी समानताएं बताई जा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने वहां इस्तेमाल की गई तकनीक को सीखने योग्य बताया।

इस दौरान भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के इंफ्रास्ट्रक्चर एवं जल प्रबंधन मंत्रालय के बीच एक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर भी किए गए। इस समझौते के तहत दोनों देश कल्पसर प्रोजेक्ट को लेकर तकनीकी सहयोग करेंगे। माना जा रहा है कि इससे लंबे समय से अटकी इस परियोजना को नई दिशा मिलेगी।

कल्पसर प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री मोदी के उन बड़े सपनों में शामिल है, जिसकी परिकल्पना उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए की थी। गुजरात लंबे समय से सूखा और अनियमित वर्षा जैसी समस्याओं से जूझता रहा है। सरदार सरोवर बांध ने राज्य को काफी राहत दी, लेकिन भविष्य की जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कल्पसर जैसी विशाल परियोजना की जरूरत महसूस की गई।

इस परियोजना के तहत खंभात की खाड़ी पर एक विशाल बांध बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य उन सात नदियों के पानी को संरक्षित करना है जो अभी समुद्र में जाकर मिल जाती हैं। योजना के अनुसार यहां एक विशाल मीठे पानी का जलाशय तैयार होगा। इसके साथ ही ज्वारीय ऊर्जा उत्पादन, सिंचाई और परिवहन नेटवर्क को भी विकसित किया जाएगा।

साल 2004 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भावनगर में समुद्री सर्वेक्षण शुरू किया गया था ताकि बांध की संभावित संरचना और दिशा तय की जा सके। हालांकि परियोजना की जटिल तकनीकी चुनौतियों के कारण इसकी गति धीमी रही। सरकार लगातार इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करती रही है।

हाल ही में गुजरात के मुख्यमंत्री Bhupendra Patel ने नीदरलैंड की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स के साथ बैठक कर इस परियोजना पर विस्तार से चर्चा की थी। इसमें भारत और नीदरलैंड के विशेषज्ञों के संयुक्त समूह के गठन और सरकारी साझेदारी पर सहमति बनी थी।

कल्पसर प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद सौराष्ट्र के नौ जिलों के 42 तालुकों में लगभग 10 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र के बीच की दूरी 240 किलोमीटर से घटकर केवल 60 किलोमीटर रह जाएगी।

परियोजना से करीब 1500 मेगावाट पवन ऊर्जा और 1000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन की संभावना भी जताई जा रही है। इसके साथ पर्यटन और मत्स्य उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।

डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट में सबसे महत्वपूर्ण हिस्से ‘क्लोजर मेथडोलॉजी’ को विकसित करने में नीदरलैंड की प्रसिद्ध समुद्री इंजीनियरिंग संस्था रॉयल हास्कोनिंग की विशेषज्ञता ली गई है। वहीं अफ्सलाउटडाइक परियोजना पिछले 90 वर्षों से समुद्री बांध निर्माण और बाढ़ नियंत्रण का वैश्विक उदाहरण मानी जाती है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार यह साझेदारी जल प्रबंधन, जलवायु अनुकूलन और सतत बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भारत और नीदरलैंड की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डच तकनीक और अनुभव से गुजरात के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को वास्तविकता में बदलने में बड़ी मदद मिलेगी।