नयी दिल्ली
नयी दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में इस बार पाठकों के लिए एक नया और आकर्षक अनुभव पेश किया गया है। ऑनलाइन बुकस्टोर बुक्सवैगन ने अपने 'एआई ऑडियोबुक बूथ' के माध्यम से पाठकों को अपनी खुद की आवाज़ में कहानियों को सुनने का अनोखा अवसर दिया है। यह बूथ हर उम्र के जिज्ञासु पाठकों का ध्यान खींच रहा है और मेले का एक प्रमुख आकर्षण बन गया है।
इस बूथ की खासियत यह है कि पाठक अपनी पसंदीदा किताब का छोटा सा अंश रिकॉर्ड कर सकते हैं और फिर उसी आवाज़ में ऑडियोबुक सुन सकते हैं। बुक्सवैगन के प्लेटफॉर्म पर 100 से अधिक शीर्षक उपलब्ध हैं, जिनमें क्लासिक साहित्य जैसे 'मोबी-डिक', 'किम', और महाकाव्य जैसे 'रामायण', 'भगवद गीता' शामिल हैं। पाठक अपनी आवाज़ का केवल 30 सेकंड का नमूना रिकॉर्ड करते हैं, और एआई तकनीक तुरंत उनकी आवाज़ की 'क्लोन' तैयार कर देती है।
बुक्सवैगन के संस्थापक शुभम जैन ने बताया, “सिर्फ़ 30 सेकंड का नमूना ही काफी है। अभी यह सुविधा डेमो फ़ॉर्मेट में उपलब्ध है, जिसमें उपयोगकर्ता केवल कुछ हिस्से सुन सकते हैं, लेकिन इसका पूरा संस्करण अगले महीने तक आने की उम्मीद है।” उन्होंने कहा कि पूरी ऑडियोबुक अपनी खुद की आवाज़ में सुनने का अनुभव जल्द ही संभव होगा।
इस तकनीक का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि अब कोई भी अपनी या किसी प्रियजन की आवाज़ में कहानियों को सुन सकता है। जैन ने उदाहरण देते हुए कहा कि बच्चे दादी की आवाज़ में पंचतंत्र की कहानियां सुन सकते हैं, माता-पिता सोते समय बच्चों को अपनी आवाज़ में कहानी सुना सकते हैं, या किसी प्रियजन की आवाज़ में पसंदीदा किताबें एनिमेट कर सकते हैं।
पाठकों की प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है। 14 साल की छात्रा वर्षा पुंज ने कहा कि अपनी खुद की आवाज़ में कहानी सुनना बेहद रोमांचक अनुभव था। उन्होंने बताया, “यह देखना कमाल का था कि एआई केवल कुछ ही मिनटों में मेरी आवाज़ को क्लोन कर सकता है। यह अनुभव सच में अद्भुत और यादगार था।”
बुक्सवैगन का यह एआई ऑडियोबुक बूथ न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह पाठकों को किताबों के प्रति नई रुचि और जुड़ाव का अनुभव भी देता है। मेले में हर उम्र के पाठक लाइन में लगकर अपनी आवाज़ में कहानियों को सुनने का अनुभव ले रहे हैं, और यह साबित कर रहा है कि डिजिटल तकनीक साहित्य के आनंद को और अधिक व्यक्तिगत और रोमांचक बना सकती है।