अहमदाबाद
अहमदाबाद के आसमान में बुधवार सुबह हजारों रंग-बिरंगी पतंगों ने उड़ान भरी और शहर उत्तरायण के जश्न में रंगीन हो उठा। इस अवसर पर लोग अपने-अपने घरों और छतों पर पतंगबाजी के लिए उमड़ पड़े, और “काई पो छे” की गूंज से माहौल जीवंत हो गया।
छतों पर बज रही बॉलीवुड गीतों की धुन और 'चिक्की' की खुशबू ने उत्सव की रौनक को और बढ़ा दिया। गुजरात में मकर संक्रांति को उत्तरायण कहा जाता है और यह पर्व केवल आसमान तक सीमित नहीं रहकर गलियों, मोहल्लों और घरों में भी उत्साह भर देता है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस अवसर पर अपने परिवार और नारनपुरा इलाके के लोगों के साथ पतंगबाजी का आनंद उठाया। पतंगबाजी के दौरान प्रतिद्वंद्वी की पतंग काटने पर लगने वाला “काई पो छे” और डोर लपेटने का इशारा “लपेट” हर जगह सुनाई दे रहा था।
शहर की सड़कों पर इस दिन यातायात अपेक्षाकृत कम रहा क्योंकि अधिकतर लोग अपने घरों की छतों पर ही जमे रहे। महिलाओं ने छतों पर चटाइयां बिछाकर पारंपरिक उत्तरायण व्यंजन परोसे, जिनमें गन्ना, चिक्की, फाफड़ा, भजिया और इस पर्व की खास डिश ‘उंधियू’ के साथ पूरी शामिल थी।
मणिनगर निवासी 60 वर्षीय संजय दहनुकर ने कहा कि उत्तरायण उनका सबसे प्रिय त्योहार है क्योंकि यह पूरे परिवार को एक साथ लाता है। उन्होंने बताया, “मैं दो दिनों के लिए अपना कारोबार बंद रखता हूं ताकि पूरी तरह से पतंगबाजी का आनंद ले सकूं। पुराने शहर में रहते समय खरीदारी के लिए बाहर निकलना पड़ता था, लेकिन अब शहर के बाहरी इलाके में रहते हुए भी उत्साह वही बना हुआ है।”
पूर्वी अहमदाबाद के 29 वर्षीय विरल ने भी यही भावना व्यक्त की। उन्होंने कहा, “पूर्वी अहमदाबाद का उत्तरायण कभी अपना आकर्षण नहीं खोएगा। यह दिन मुझे बचपन की याद दिलाता है, जब हम सूर्योदय से सूर्यास्त तक छतों पर रहते थे।” विरल ने बताया कि बड़ी कंपनियों में काम करने वाले उनके कई दोस्त छुट्टी लेने के बाद उत्तरायण मनाने के लिए बाहर गए थे, लेकिन उन्होंने अहमदाबाद में रहकर त्योहार मनाना ही बेहतर समझा।
हर साल उत्तरायण से पहले अहमदाबाद में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का आयोजन किया जाता है। यह पर्व सूर्य के उत्तरायण होने और गर्मी के आगमन का संकेत देता है। इस साल भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सोमवार को इस अवसर पर पतंगबाजी का आनंद लिया।
असमय शुरुआत से लेकर सूर्यास्त तक छतों पर पतंगों की बहार ने साबित कर दिया कि उत्तरायण केवल त्योहार नहीं, बल्कि गुजरातियों की सांस्कृतिक पहचान और पारिवारिक मिलन का प्रतीक है।