‘नागरिक प्रथम’ मंत्र को अपनाने की आवश्यकताः प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसेवकों से कहा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 02-04-2026
Need to adopt 'citizen first' mantra: PM Modi to public servants
Need to adopt 'citizen first' mantra: PM Modi to public servants

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने के लिए तेजी से बदलते समय के साथ शासन व्यवस्था को लगातार अद्यतन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
 
उन्होंने कहा कि आज देश के प्रशासन का मूल मंत्र ‘नागरिक देवो भव:’ है और सार्वजनिक सेवा को नागरिकों की जरूरतों के प्रति अधिक सक्षम और संवेदनशील बनाने के लिए पुनर्गठित किया जा रहा है।
 
मोदी ने ‘साधना सप्ताह’ कार्यक्रम की शुरुआत पर एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘शासन को अब सही मायने में नागरिक-केंद्रित बनाकर एक नयी पहचान दी जा रही है।’’
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि नागरिकों के जीवन की सुगमता और गुणवत्ता में सुधार के लिए शासन व्यवस्था ही मानदंड होनी चाहिए और उन्होंने लोक सेवकों से प्रतिदिन कुछ नया सीखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी शासन व्यवस्था यह सुनिश्चित करे कि नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में दिन-प्रतिदिन सुधार हो। यही हमारा सच्चा मानदंड है।’’
 
प्रशासनिक संस्कृति में बुनियादी बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में ‘अधिकारी’ होने पर अत्यधिक जोर दिया जाता था, जबकि आज देश का ध्यान पूरी तरह कर्तव्य भावना पर केंद्रित है।
 
उन्होंने लोकसेवकों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हर निर्णय से पहले यदि आप यह सोचें कि आपका कर्तव्य क्या मांगता है, तो आपके निर्णयों का प्रभाव खुद कई गुना बढ़ जाएगा।’’
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक व्यवस्थाओं के बीच भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और उसे अपनी शासन प्रणाली को लगातार अद्यतन करते रहना होगा।
 
लोकसेवकों को यह याद दिलाते हुए कि आम नागरिक के लिए स्थानीय सरकारी दफ्तर ही पूरे शासन का चेहरा होता है, मोदी ने कहा कि अधिकारियों की कार्यशैली और व्यवहार लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को सीधे प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम जो भी करें, जिस भी स्तर पर करें, हमें उस विश्वास की रक्षा करनी चाहिए; यही हमारे लोकतंत्र की नींव है।’’