नई दिल्ली
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) रिकवरी के एक नए दौर में प्रवेश कर रही हैं। लोन ग्रोथ, एसेट क्वालिटी और मुनाफे में सुधार से व्यापक स्तर पर कमाई में बढ़ोतरी की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि उसके कवरेज दायरे में आने वाली NBFCs का टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) FY27 में 24% और FY28 में 18% बढ़ेगा। पहली तिमाही के नतीजों ने इस रिकवरी की पुष्टि की है, जिसे अब सिर्फ कम क्रेडिट लागत के बजाय कई कारकों से समर्थन मिल रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "FY27 की पहली तिमाही के नतीजों ने हमारे इस अनुमान को मजबूती से सही साबित किया है कि NBFCs रिकवरी के एक नए दौर में प्रवेश कर रही हैं।" रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर लोन ग्रोथ, एसेट क्वालिटी में व्यापक सुधार, मजबूत मार्जिन और बेहतर ऑपरेटिंग लेवरेज के कारण ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस में सुधार हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा रिकवरी पिछले दौरों से अलग है क्योंकि कमाई में सुधार को कई कारकों से एक साथ समर्थन मिल रहा है: सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड दोनों सेगमेंट में अच्छी लोन ग्रोथ, क्रेडिट लागत में उम्मीद से तेज सामान्यीकरण, फंडिंग लागत में कमी, मजबूत मार्जिन और बेहतर ऑपरेटिंग लेवरेज।
हालांकि, रिपोर्ट ने कई ऐसे जोखिमों की ओर भी इशारा किया है जो इस सेक्टर की रिकवरी को प्रभावित कर सकते हैं। पश्चिम एशिया में जारी संकट और इसके और बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें और घरेलू महंगाई बढ़ सकती है, जिससे मौद्रिक नीति में ढील में देरी हो सकती है और वित्तीय स्थितियां सख्त हो सकती हैं। ऊर्जा की ऊंची कीमतें उधार लेने की लागत भी बढ़ा सकती हैं और क्रेडिट की मांग को कमजोर कर सकती हैं।
मानसून की स्थिति और अल-नीनो की संभावित घटनाक्रम भी एक महत्वपूर्ण पहलू है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित कर्जदाताओं के लिए। रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य से कमजोर या असमान मानसून ग्रामीण आय और खपत को नुकसान पहुंचा सकता है, क्रेडिट की मांग कम कर सकता है और माइक्रोफाइनेंस व वाहन फाइनेंसिंग जैसे सेगमेंट में लोन डिफॉल्ट (डेलिंक्वेंसी) बढ़ा सकता है।
मोतीलाल ओसवाल को यह भी उम्मीद है कि महंगाई और व्यापक आर्थिक स्थितियों के आधार पर अगले 6-9 महीनों में ब्याज दरों में 25-50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसी बढ़ोतरी से फंडिंग लागत बढ़ सकती है और मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है, खासकर उन NBFCs के लिए जिनकी कीमत तय करने की क्षमता सीमित है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एसेट क्वालिटी में सुधार एक "सबसे उल्लेखनीय आश्चर्य" के रूप में सामने आया है। माइक्रोफाइनेंस और अनसिक्योर्ड लोन जैसे सेगमेंट में लगभग दो साल के तनाव के बाद अब कलेक्शन क्षमता में सुधार हो रहा है और नए बैड लोन (स्लिपेज) की दर कम हो रही है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि डाइवर्सिफाइड NBFCs का PAT FY27 में 40% और FY28 में 28% बढ़ेगा, जबकि व्हीकल फाइनेंसरों के PAT में क्रमशः 39% और 18% की बढ़ोतरी का अनुमान है। हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के मामले में PAT में थोड़ी कम बढ़ोतरी की उम्मीद है - FY27 में 8% और FY28 में 13%।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस सेक्टर का फोकस रिकवरी से हटकर कमाई और रिटर्न-रेश्यो साइकिल की मजबूती पर जा रहा है। इसमें कहा गया, "अब सवाल यह नहीं है कि साइक्लिकल रिकवरी होगी या नहीं, बल्कि यह है कि कमाई और रिटर्न-रेश्यो साइकिल कब तक चल सकती है।"