Nagaland government reviews oil exploration, landowners' rights and flood-landslide situation
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
नगालैंड सरकार ने तेल खोज, भू-स्वामियों के अधिकार, प्रस्तावित ‘फुटहिल रोड’ तथा बाढ़ और भूस्खलन से निपटने के लिए राज्य की तैयारियों से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की है। राज्य के मंत्री तेमजेन इम्ना अलोंग ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अलोंग ने यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से बातचीत में छह अगस्त को वोखा में हुई मंत्रिमंडल की बैठक को ‘ऐतिहासिक’ बताते हुए कहा कि इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
असम-नगालैंड सीमा पर तेल खोज के संबंध में अलोंग ने कहा कि सरकार भू-स्वामियों और अन्य प्रभावित पक्षों के अधिकारों एवं चिंताओं की रक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘मंत्रिमंडल का मानना है कि सभी चिंताओं का हरसंभव तरीके से समाधान किया जाना चाहिए।’’
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब नागरिक समाज के संगठनों ने तेल खोज गतिविधियों को आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित गांवों और अन्य हितधारकों से विचार-विमर्श करने की मांग की है।
केंद्रीय नगालैंड जनजाति परिषद (सीएनटीसी) की ओर से उठाई गई चिंताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तेल खोज से प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों के हितधारकों को ध्यान में रखना होगा।
भारत सरकार, असम और नगालैंड के बीच 11 जून को नयी दिल्ली में एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसमें असम-नगालैंड सीमा क्षेत्रों में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खोज एवं उत्पादन सहित खनिज तेल संबंधी गतिविधियों को सुगम बनाने का प्रावधान है।
‘फुटहिल रोड’ के संबंध में अलोंग ने कहा कि केंद्र सरकार और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय सहित संबंधित पक्षों के साथ भी चर्चा की गई है।