आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
हैदराबाद, 13 जून (पीटीआई)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि उभरती हुई तकनीकों ने युद्ध की परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया है और सशस्त्र बलों में शामिल होने वाले नए अधिकारियों को आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।
शनिवार को हैदराबाद के निकट डुंडीगल स्थित वायुसेना अकादमी में संयुक्त स्नातक परेड को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पहले युद्ध के मैदान में बड़ी शक्तियों का स्पष्ट वर्चस्व दिखाई देता था, लेकिन अब छोटी ताकतें भी आधुनिक हथियारों और नई रणनीतियों के जरिए भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं।
उन्होंने कहा कि आज के युद्ध केवल सैनिकों और हथियारों तक सीमित नहीं रह गए हैं। रडार, उपग्रह, ड्रोन, सेंसर और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक प्रणालियां युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। कई बार विरोधी देशों के यातायात तंत्र और सीसीटीवी नेटवर्क तक को नियंत्रित करने जैसी परिस्थितियां भी देखने को मिल रही हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि नव-नियुक्त अधिकारियों को आधुनिक युद्ध की रणनीतियों को समझना होगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें अपनाने तथा उनमें बदलाव करने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कड़ी मेहनत के साथ-साथ स्मार्ट तरीके से काम करने के महत्व पर भी जोर दिया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय वायुसेना करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का उदाहरण देते हुए अधिकारियों से वायुसेना की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
महिला पायलटों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी बढ़ती संख्या भारतीय वायुसेना को और अधिक मजबूत, संतुलित और समावेशी बना रही है। उन्होंने आपदा और बचाव अभियानों में वायुसेना की भूमिका की भी सराहना की और कहा कि संकट के समय विदेशी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी वायुसेना ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।