सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD की कार्रवाई, 543 प्रॉपर्टीज ध्वस्त, 178 सील

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 25-09-2026
MCD demolishes 543 properties, seals 178 in 17 day crackdown after Satya Niketan building collapse
MCD demolishes 543 properties, seals 178 in 17 day crackdown after Satya Niketan building collapse

 

नई दिल्ली

दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल एक अनुपालन हलफनामे के अनुसार, सत्य निकेतन में एक पेइंग गेस्ट (PG) बिल्डिंग के गिरने के बाद 17 दिनों की अवधि में दिल्ली नगर निगम (MCD) ने 543 संपत्तियों को गिरा दिया, 178 अन्य को सील कर दिया और अनधिकृत निर्माण के लिए 354 कारण बताओ नोटिस जारी किए। हाई कोर्ट के समक्ष कार्यवाही में MCD के कार्यकारी इंजीनियर (भवन) मुख्यालय अजय कुमार जैन द्वारा 24 सितंबर को दाखिल हलफनामे के अनुसार, यह प्रवर्तन कार्रवाई 6 सितंबर और 23 सितंबर, 2026 के बीच की गई थी। इसी अवधि के दौरान, नगर निकाय ने सीलिंग के लिए 205 कारण बताओ नोटिस और 98 विध्वंस आदेश जारी किए।
 
यह हलफनामा हाई कोर्ट के 7 सितंबर के निर्देशों के अनुपालन में दाखिल किया गया था, जिसमें MCD को गिरने वाली बिल्डिंग की अनुमति और मंज़ूरी की स्थिति की जांच करने, उल्लंघन पाए जाने पर ज़िम्मेदारी तय करने और अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले PG हॉस्टलों का निरीक्षण करने के लिए कहा गया था। गिरी हुई सत्य निकेतन बिल्डिंग का कोई मंज़ूरशुदा प्लान नहीं था. एक महत्वपूर्ण खुलासे में, MCD ने बताया कि सत्य निकेतन की प्रॉपर्टी नंबर 14, जो 6 सितंबर को गिर गई थी, का कोई भी बिल्डिंग प्लान नगर निकाय द्वारा कभी मंज़ूर नहीं किया गया था।
 
हलफनामे के अनुसार, ग्राउंड, पहली और दूसरी मंज़िल और तीसरी मंज़िल का कुछ हिस्सा 1970-1980 के दौरान बनाया गया था, जबकि बेसमेंट और तीसरी मंज़िल का बाकी हिस्सा बाद में 1997-98 में बनाया गया था। MCD ने इस ढांचे को बिना RCC फ्रेम वाली लोड-बेयरिंग बिल्डिंग बताया, जिसकी ईंट की दीवारें केवल 4.5 इंच मोटी थीं। हलफनामे में कहा गया है कि यह प्रॉपर्टी MCD की किसी वैध अनुमति के अनुसार नहीं बनाई गई थी। इस प्रॉपर्टी का इस्तेमाल ग्राउंड फ्लोर पर दुकानों के लिए और ऊपरी मंजिलों पर PG के तौर पर किया जा रहा था। MCD ने कहा कि सालाना आधार पर लागू कन्वर्ज़न चार्ज का भुगतान करने के बाद 2007 से PG के तौर पर इसका इस्तेमाल हो रहा था। 
 
हालांकि, नगर निकाय ने कहा कि 1 जनवरी, 2026 से इस प्रॉपर्टी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं मिली थी और उनके रिकॉर्ड में इस प्रॉपर्टी में किसी अनधिकृत निर्माण की कोई जानकारी भी दर्ज नहीं थी। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में कोई नया निर्माण होता नहीं पाया गया, हालांकि मालिक ने हाल ही में कुछ मरम्मत या नवीनीकरण का काम करवाया था। इमारत गिरने का सही कारण पता नहीं चल सका, लेकिन MCD को आशंका है कि पिछले कुछ दिनों में हुई भारी बारिश से पुरानी संरचना कमजोर हो गई होगी।
 
इमारत गिरने के बाद, MCD ने सत्य निकेतन में लगभग 300 प्रॉपर्टीज़ का विस्तृत निरीक्षण किया और पाया कि 101 प्रॉपर्टीज़ में PG आवास चल रहे थे। सत्य निकेतन की तीन प्रॉपर्टीज़ को खतरनाक घोषित किया गया और दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 348 के तहत नोटिस जारी किए गए। इसके बाद मालिकों और रहने वालों ने नोटिस के खिलाफ हाई कोर्ट का रुख किया। हलफनामे में कहा गया है कि हालांकि हाई कोर्ट ने नोटिस पर रोक लगा दी थी, लेकिन कोर्ट ने निर्देश दिया कि जब तक ये प्रॉपर्टीज़ संरचनात्मक रूप से सुरक्षित नहीं पाई जातीं, तब तक इनमें कोई PG नहीं चलना चाहिए। नतीजतन, इन तीन प्रॉपर्टीज़ में चल रहे PG आवास खाली करवा दिए गए।
 
MCD ने 10 ऐसी प्रॉपर्टीज़ की भी पहचान की जो कमजोर थीं और जिनमें बड़ी मरम्मत की आवश्यकता थी। इनमें से सात 'लोड-बेयरिंग' संरचनाएं थीं (ग्राउंड फ्लोर के अलावा तीन मंजिलें), जबकि तीन 'फ्रेम्ड' संरचनाएं थीं (ग्राउंड फ्लोर के अलावा चार मंजिलें)। उनके मालिकों को निर्देश दिया गया कि वे 10 दिनों के भीतर IIT दिल्ली या दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) के विशेषज्ञों से विस्तृत संरचनात्मक ऑडिट करवाएं और ऑडिट के नतीजों के आधार पर मजबूती लाने या मरम्मत का काम करें।
14 अन्य प्रॉपर्टीज़ में मामूली मरम्मत की आवश्यकता पाई गई, जिसके लिए नोटिस जारी किए गए।
 
MCD के सभी 12 ज़ोन में किए गए व्यापक सर्वेक्षण में 2,453 PG इमारतें पाई गईं जिनमें 32,247 कमरे थे और जिनमें लगभग 50,529 लोगों के रहने का अनुमान था।
इनमें से 730 इमारतों के लिए ही वर्तमान में उपलब्ध रिकॉर्ड से बिल्डिंग प्लान का पता लगाया जा सका या उन्हें स्वीकृत माना जा सका।
 
MCD ने कहा कि 2,342 इमारतें देखने में सुरक्षित पाई गईं, जबकि 91 में मामूली मरम्मत, 30 में बड़ी मरम्मत की आवश्यकता थी और चार खतरनाक स्थिति में पाई गईं। इसके अलावा, ज़मीन के ऊपर आठ लोड-बेयरिंग स्ट्रक्चर (जिनमें तीन मंज़िलें थीं) और 77 फ़्रेम वाले स्ट्रक्चर (जिनमें चार मंज़िलें थीं) की पहचान की गई, जिन पर बारीकी से नज़र रखने की ज़रूरत थी क्योंकि उनके कमज़ोर होने की आशंका थी।
 
नगर निकाय ने साफ़ किया कि 50,529 लोगों की संख्या अभी शुरुआती है और अलग-अलग ज़ोन से मिले डेटा की और जाँच-पड़ताल और मिलान के बाद इसमें बदलाव हो सकता है। निकाय ने यह भी कहा कि हर इमारत की अलग-अलग जाँच चल रही है और जहाँ भी मंज़ूर बिल्डिंग प्लान, बिल्डिंग के नियमों, तय इस्तेमाल या दूसरी कानूनी ज़रूरतों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहाँ कार्रवाई की जाएगी।
 
हलफ़नामे में यह भी कहा गया है कि इमारत गिरने के अगले दिन, यानी 7 सितंबर को, सुपरवाइज़री चेन में शामिल MCD के पाँच अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया।
सस्पेंड किए गए अधिकारियों में राकेश कुमार (डिप्टी कमिश्नर, साउथ ज़ोन), रणवीर सिंह (सुपरिटेंडिंग इंजीनियर, साउथ ज़ोन), ललित कुमार (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर - बिल्डिंग, साउथ ज़ोन) और सुनील चौहान (असिस्टेंट...) शामिल थे।