आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
बिहार में बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली पहली सरकार का बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार हुआ और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार तथा 31 अन्य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे।
राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने पांच दलों वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सभी 32 नेताओं को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा तथा बिहार भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन भी उपस्थित थे।
सभी की निगाहें निशांत कुमार (45) पर टिकी थीं, जिन्होंने करीब दो महीने पहले नीतीश के मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा सदस्य बनने की घोषणा के बाद सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था।
पिछले महीने भाजपा नेता सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के समय उपमुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव ठुकराने वाले निशांत ने अंततः पार्टी नेताओं के आग्रह को स्वीकार कर लिया। पार्टी नेताओं को आशंका थी कि नीतीश के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद जदयू की राजनीतिक संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
शपथ लेने से पहले सार्वजनिक जीवन से अपेक्षाकृत दूर रहने वाले निशांत कुमार ने अपने पिता के साथ-साथ शाह और मोदी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में 89 विधायकों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और अब उसके मंत्रियों की संख्या 15 हो गई है।
मंत्रिमंडल में शामिल अधिकांश नेता वे हैं जो पिछले वर्ष नवंबर में राजग की सत्ता में वापसी के बाद बनी नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रह चुके थे।
झंझारपुर के विधायक नीतीश मिश्रा की भी मंत्रिमंडल में वापसी हुई है। उद्योग राज्य मंत्री के रूप में उन्होंने प्रभाव छोड़ा था, लेकिन पिछले वर्ष नवंबर में नीतीश कुमार के फिर मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया था। उनके पिता दिवंगत जगन्नाथ मिश्रा बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रह चुके थे।
हालांकि, पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मंगल पांडेय को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलना चर्चा का विषय रहा। वह पिछले कई वर्ष से स्वास्थ्य विभाग संभाल रहे थे।
पांडेय फिलहाल पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी हैं और अटकलें हैं कि राज्य में पार्टी की हालिया सफलता के बाद उन्हें अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
भाजपा ने बिहार की राजनीति में मंडल प्रभाव को देखते हुए ‘‘सिर्फ सवर्णों की पार्टी’’ की छवि तोड़ने का प्रयास भी किया है। पार्टी ने अपने पहले मुख्यमंत्री के रूप में पिछड़ा वर्ग के नेता को चुना है और मंत्रिमंडल में केवल छह सवर्ण नेताओं को शामिल किया गया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के साथ दो दलित नेताओं — लखेंद्र पासवान और नंद किशोर राम — को भी शामिल किया गया है।
राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने पांच दलों वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सभी 32 नेताओं को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा तथा बिहार भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन भी उपस्थित थे।
सभी की निगाहें निशांत कुमार (45) पर टिकी थीं, जिन्होंने करीब दो महीने पहले नीतीश के मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा सदस्य बनने की घोषणा के बाद सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था।
पिछले महीने भाजपा नेता सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के समय उपमुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव ठुकराने वाले निशांत ने अंततः पार्टी नेताओं के आग्रह को स्वीकार कर लिया। पार्टी नेताओं को आशंका थी कि नीतीश के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद जदयू की राजनीतिक संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
शपथ लेने से पहले सार्वजनिक जीवन से अपेक्षाकृत दूर रहने वाले निशांत कुमार ने अपने पिता के साथ-साथ शाह और मोदी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में 89 विधायकों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और अब उसके मंत्रियों की संख्या 15 हो गई है।
मंत्रिमंडल में शामिल अधिकांश नेता वे हैं जो पिछले वर्ष नवंबर में राजग की सत्ता में वापसी के बाद बनी नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रह चुके थे।
झंझारपुर के विधायक नीतीश मिश्रा की भी मंत्रिमंडल में वापसी हुई है। उद्योग राज्य मंत्री के रूप में उन्होंने प्रभाव छोड़ा था, लेकिन पिछले वर्ष नवंबर में नीतीश कुमार के फिर मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया था। उनके पिता दिवंगत जगन्नाथ मिश्रा बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री रह चुके थे।
हालांकि, पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मंगल पांडेय को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलना चर्चा का विषय रहा। वह पिछले कई वर्ष से स्वास्थ्य विभाग संभाल रहे थे।
पांडेय फिलहाल पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी हैं और अटकलें हैं कि राज्य में पार्टी की हालिया सफलता के बाद उन्हें अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
भाजपा ने बिहार की राजनीति में मंडल प्रभाव को देखते हुए ‘‘सिर्फ सवर्णों की पार्टी’’ की छवि तोड़ने का प्रयास भी किया है। पार्टी ने अपने पहले मुख्यमंत्री के रूप में पिछड़ा वर्ग के नेता को चुना है और मंत्रिमंडल में केवल छह सवर्ण नेताओं को शामिल किया गया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के साथ दो दलित नेताओं — लखेंद्र पासवान और नंद किशोर राम — को भी शामिल किया गया है।