Lakhs of devotees witnessed Lord Jagannath's 'Snana Yatra' in Puri, Odisha.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों के पारंपरिक स्नान अनुष्ठान का आयोजन सोमवार तड़के 12वीं शताब्दी के मंदिर परिसर में किया गया। इस दौरान देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
स्नान यात्रा वार्षिक रथ यात्रा का पूर्व आयोजन मानी जाती है। इस अवसर पर भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को गर्भगृह से बाहर लाया जाता है और सार्वजनिक रूप से 108 कलशों के जल से पवित्र स्नान कराया जाता है।
मंदिर परिसर में बने ऊंचे मंच पर आयोजित इस अनुष्ठान का दर्शन श्रद्धालु मंदिर के सामने स्थित भव्य मार्ग से करते हैं।
इस वर्ष स्नान यात्रा की शुरुआत सुबह 5:15 बजे देवताओं की पारंपरिक 'पाहंडी' यानी शोभायात्रा के साथ हुई, जो सुबह आठ बजे तक चली।
स्कंद पुराण के अनुसार, 12वीं शताब्दी के इस मंदिर में काष्ठ प्रतिमाओं की स्थापना करने वाले राजा इंद्रद्युम्न ने ही इस स्नान अनुष्ठान की शुरुआत की थी।
वेदी पर विराजमान किए जाने के बाद सेवायतों ने 'मंगला आरती' की, जो मंदिर के कपाट खुलने के बाद भगवान की पहली आरती होती है। स्नान पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं को खुले मंडप से मंगला आरती के दर्शन का अवसर मिलता है।