आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कर्नाटक में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत अब तक मतदाताओं को 43.82 लाख से अधिक नोटिस दिए जा चुके हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
कार्यालय ने बताया कि निर्वाचन आयोग को 16 जून से 15 अक्टूबर के बीच फॉर्म-7 के तहत 1,55,109 आवेदन भी मिले। इनमें से कोई भी प्रस्तावित नाम जोड़ने पर आपत्ति से संबंधित नहीं था, यानी सभी आवेदनों में मतदाता सूची से नाम हटाने की मांग की गई थी।
फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कराने या सूची से नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है।
अधिकारियों ने बताया कि ‘मैपिंग नहीं होने’ और ‘विसंगतियों’ की श्रेणियों में आने वाले मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने एक बयान में कहा कि 16 अक्टूबर तक कर्नाटक में कुल 4,54,03,198 मतदाता थे। इनमें 2.25 करोड़ पुरुष, 2.28 करोड़ महिलाएं और 2,860 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं।
बयान के अनुसार, राज्यभर में कुल 43,82,824 नोटिस तैयार कर मतदाताओं को दिए गए। इनमें से 43,63,459 मामलों (99.56 प्रतिशत) में सुनवाई पूरी हो चुकी है, जबकि 19,365 मामले लंबित हैं।
दावों और आपत्तियों के निपटारे तथा नोटिस संबंधी प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तारीख 22 अक्टूबर है।
आंकड़ों के अनुसार, 16 जून से 15 अक्टूबर के बीच फॉर्म-6 के 10,07,392, फॉर्म-6ए के 4,777, फॉर्म-7 के 1,55,109 और फॉर्म-8 के 12,79,525 आवेदन प्राप्त हुए। इस अवधि में कुल 24,46,803 आवेदन मिले।
जिलावार आंकड़ों के अनुसार, फॉर्म-7 के सबसे अधिक 11,782 आवेदन बेंगलुरु शहरी जिले में प्राप्त हुए। इसके बाद बीबीएमपी उत्तर में 9,274 और दक्षिण कन्नड़ जिले में 9,101 आवेदन मिले।
सीईओ कार्यालय ने दोहराया कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत उन आवेदकों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है, जिन्होंने फॉर्म-6, 6ए, 7 या 8 में जानबूझकर लिखित रूप से गलत बयान या घोषणा की है। यह कार्रवाई निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 20 के तहत जांच के बाद की जाएगी।