केरल: हाथियों को लेकर सरकारी आदेश को चुनौती, उच्च न्यायालय ने केंद्र व राज्य सरकार से मांगा जवाब

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 25-04-2026
Kerala: Government order regarding elephants challenged
Kerala: Government order regarding elephants challenged

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
केरल उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। इस याचिका में एक सरकारी आदेश के उस प्रावधान को चुनौती दी गई है जो हाथियों की खाल और उनके दांत से बनी वस्तुओं को अपने पास रखने की घोषणा करने की अनुमति देता है।
 
त्रिशूर स्थित गैर सरकारी संगठन ‘वॉकिंग आई फाउंडेशन फॉर एनिमल एडवोकेसी’ ने यह याचिका दायर करते हुए आशंका जताई है कि हाथियों को अपने पास रखने की घोषणा की अनुमति देने से परोक्ष रूप से स्वामित्व प्रमाणपत्र हासिल करने का द्वार खुल जाएगा, जो उच्चतम न्यायालय के एक आदेश का सीधा उल्लंघन होगा।
 
न्यायमूर्ति जियाद रहमान ए ए और न्यायमूर्ति के वी जयकुमार की खंडपीठ ने पर्यावरण मंत्रालय, केरल सरकार और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है।
 
एनजीओ ने अपनी याचिका में कहा है कि मार्च 2026 के सरकारी आदेश में जानवरों, उनके अंगों से बने उत्पादों की घोषणा के लिए 45 दिन की नयी अवधि दी गई है और इसमें अनुसूची-एक की प्रजातियां भी शामिल हैं, जिनके अंतर्गत पालतू हाथी आते हैं।
 
याचिका के अनुसार यह आदेश उच्चतम न्यायालय के 2016 के उस निर्देश का उल्लंघन है, जिसमें हाथियों के नए स्वामित्व प्रमाणपत्र जारी करने पर रोक लगाई गई थी।
 
एनजीओ की दलील है कि राज्य सरकार को इस आदेश के दायरे से हाथियों को बाहर रखना चाहिए था।
 
याचिका में वन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि केरल में कुल 388 पालतू हाथी हैं जिनमें से 39 वन विभाग की देखरेख में हैं, जबकि शेष 349 निजी व्यक्तियों और संस्थाओं के पास हैं और इन 349 में से बड़ी संख्या में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत वैध स्वामित्व प्रमाणपत्र नहीं हैं।