आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों का घाटी में अपने घर लौटने का हमेशा स्वागत है।
विस्थापित समुदाय ने जम्मू में अपने पलायन की 36वीं बरसी मनाई और अपनी वापसी तथा पुनर्वास पर एक व्यापक नीति की मांग को दोहराया।
हालांकि, कश्मीरी पंडितों के वर्तमान में देश के अन्य हिस्सों में नये सिरे से जिंदगी की शुरुआत करने का हवाला देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने इस बात को लेकर संदेह जताया कि क्या समुदाय अब वापस आना चाहेगा?
इसी से संबंधित एक घटनाक्रम में, जम्मू कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व ने हमेशा घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी और पुनर्वास का समर्थन किया है क्योंकि कश्मीर इस समुदाय के बिना अधूरा है।
कश्मीरी पंडित 19 जनवरी को ‘नरसंहार दिवस’ के रूप में मनाते हैं। यह दिन पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों द्वारा दी गई धमकियों और हत्याओं के कारण कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के 1990 में हुए पलायन की याद दिलाता है।
समुदाय के सदस्यों ने घाटी के भीतर अपने लिए एक अलग भू-भाग समेत अपनी अन्य मांगों को लेकर यहां विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी किए।
यहां नेकां के दो दिवसीय कार्यक्रम से इतर अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा कि कई कश्मीरी पंडित परिवारों ने घाटी को नहीं छोड़ा तथा अपने गांवों और इलाकों में शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं।