Karnataka to declare 7 more taluks drought-hit; CM, Dy CM to lead delegation to Delhi for NDRF funds
बेंगलुरु (कर्नाटक)
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार को घोषणा की कि राज्य सरकार सात और तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करेगी, जिससे प्रभावित तालुकों की कुल संख्या 226 हो जाएगी। साथ ही, केंद्र से वित्तीय सहायता मांगने के लिए एक हफ़्ते के भीतर एक विस्तृत ज्ञापन (मेमोरेंडम) को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सदाशिवनगर स्थित अपने आवास के पास पत्रकारों से बात करते हुए परमेश्वर ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल, जिसमें कैबिनेट के वरिष्ठ सदस्य भी शामिल होंगे, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के दिशानिर्देशों के तहत ज्ञापन सौंपने के लिए नई दिल्ली जाएगा।
परमेश्वर ने कहा, "आज हम 7 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करेंगे। हम बाकी तालुकों के लिए ज़मीनी स्तर पर जांच (ग्राउंड ट्रूथिंग) शुरू करेंगे। एक और हफ़्ते में अंतिम ज्ञापन तैयार हो जाएगा। हमें राज्य में हुए कुल नुकसान का अनुमान मिल जाएगा। इस बात पर चर्चा होगी कि NDRF दिशानिर्देशों के अनुसार हम कितनी राशि की मांग कर सकते हैं। हमने तय किया है कि मुख्यमंत्री, मैं और अन्य सदस्य ज्ञापन सौंपने के लिए दिल्ली जाएंगे।"
उपमुख्यमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस साल पूरे राज्य में फ़सल और कृषि को काफ़ी ज़्यादा नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, "हमने इस बार सूखाग्रस्त घोषित किए गए 226 तालुकों के लिए लगभग 7,000 करोड़ रुपये की मांग की थी, और ऐसा लगता है कि इस साल नुकसान ज़्यादा हुआ है... पिछले साल 18,000 करोड़ रुपये की मांग की गई थी।"
परमेश्वर ने आगे बताया कि राज्य नेतृत्व ने स्थानीय ज़मीनी हकीकत को बेहतर ढंग से समझने के लिए मौजूदा NDRF नियमों में ढील देने की मांग करते हुए केंद्र सरकार से संपर्क किया था। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री और मैंने NDRF दिशानिर्देशों में कुछ हद तक ढील देने की मांग करते हुए पत्र लिखे थे। इसके जवाब में, केंद्रीय कृषि मंत्री ने मुझे पत्र लिखकर सूचित किया है कि अनुरोध पर विचार किया जाएगा।"
आरक्षण के मुद्दे और राष्ट्रीय राजधानी में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने की मांग से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए परमेश्वर ने कहा कि इस मामले पर कल होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में चर्चा की जाएगी। डिप्टी CM ने कहा, "कल कैबिनेट की बैठक है। इस मामले को कैबिनेट में पेश किया जाना चाहिए, उस पर चर्चा होनी चाहिए और कोई फ़ैसला लिया जाना चाहिए। हमें या तो सुप्रीम कोर्ट में अपील करनी होगी या फिर केंद्र सरकार से इसे संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल करने का अनुरोध करना होगा। इस पर आगे की कार्रवाई कैबिनेट में चर्चा और फ़ैसले के बाद ही होनी चाहिए।"