नई दिल्ली
जापान की निजी कंपनियां 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान लगभग 120 सहयोग समझौतों के माध्यम से भारत के तेजी से बढ़ते बाजार में 12.5 अरब डॉलर (करीब 2 ट्रिलियन येन) का बड़ा निवेश करने जा रही हैं। यह शिखर सम्मेलन जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा के साथ आयोजित हो रहा है।
जापान के उप मुख्य कैबिनेट सचिव मसानाओ ओजाकी, जो प्रधानमंत्री ताकाइची के साथ नई दिल्ली पहुंचे हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि 150 से अधिक जापानी कंपनियां भारत-जापान आर्थिक मंच (Japan-India Economic Forum) में भाग लेंगी। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दोनों देशों के सरकारी संबंधों को और मजबूत करेगा।
ओजाकी ने लिखा, "आज भारत-जापान शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इस अवसर पर 150 से अधिक जापानी कंपनियां भी भाग लेंगी और भारत-जापान आर्थिक मंच का आयोजन किया जाएगा। सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सरकारी सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ हमें उम्मीद है कि यह भारत-जापान आर्थिक संबंधों को नई गति देगा।"
उन्होंने जापानी समाचार पत्र योमिउरी शिम्बुन की एक रिपोर्ट भी साझा की, जिसमें कहा गया है कि लगभग 2 ट्रिलियन येन मूल्य की ये पहल भारत के तेजी से बढ़ते बाजार में जापानी कंपनियों की मौजूदगी को और मजबूत करेंगी।
संयुक्त बयान के मसौदे के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री ताकाइची समुद्री सुरक्षा तथा ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने पर सहमत होंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौतों में फुजीफिल्म द्वारा सेमीकंडक्टर सामग्री संयंत्र की स्थापना, सुजुकी की बायोगैस परियोजना तथा जापानी और भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप्स के बीच संयुक्त एप्लिकेशन विकास जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
यह 2 ट्रिलियन येन का निवेश पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच हुए उस समझौते के अनुरूप है, जिसके तहत अगले दस वर्षों में भारत में 10 ट्रिलियन येन के जापानी निजी निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
संयुक्त बयान के मसौदे में आर्थिक सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता देते हुए "भारत और जापान के बीच परस्पर पूरक सहयोग" को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसमें प्रधानमंत्री ताकाइची की 'फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (FOIP)' नीति का भी स्वागत किया गया है।
रक्षा सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग की सराहना की है। साथ ही जापान द्वारा अप्रैल में रक्षा उपकरणों के हस्तांतरण संबंधी दिशा-निर्देशों में किए गए संशोधनों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, इस वर्ष के अंत तक भारत-जापान विदेश एवं रक्षा मंत्रियों की '2+2' बैठक आयोजित करने की योजना भी शामिल है।
चीन द्वारा रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिज) तत्वों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों ने गैर-बाजार नीतियों और आर्थिक दबाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भारत और जापान संयुक्त भंडारण (Joint Stockpiling) के माध्यम से आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर सहमत होंगे। इसके अलावा भारतीय बाजार में प्रवेश करने वाले लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को समर्थन देने, भारत के कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने तथा जेआर ईस्ट की विकसित की जा रही E10 शिंकानसेन (बुलेट ट्रेन) को भारत लाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
तकनीकी सहयोग के तहत दोनों देशों ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सहित नवाचार को बढ़ावा देना भारत-जापान सहयोग की मजबूत नींव को और विस्तारित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री साने ताकाइची बुधवार को नई दिल्ली पहुंचीं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।
भारत रवाना होने से पहले उन्होंने कहा था कि इस यात्रा के दौरान आयोजित होने वाले भारत-जापान आर्थिक मंच में जापान के कारोबारी जगत के 150 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। उन्होंने कहा, "सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर भारत-जापान सहयोग का दायरा बढ़ाएंगे और एक मजबूत अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।"
ताकाइची ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बातचीत में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा प्रमुख विषय होंगे।
नई दिल्ली पहुंचने के बाद एक्स पर उन्होंने लिखा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारत के साथ रणनीतिक सहयोग को और गहरा करना उनकी यात्रा का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि दोनों देश अपनी 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' को और मजबूत बनाने तथा परस्पर पूरक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे।
भारत और जापान ने वर्ष 2014 में अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी (Special Strategic and Global Partnership) का दर्जा दिया था। तब से दोनों देशों के बीच रक्षा, बुनियादी ढांचा, व्यापार, डिजिटल तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, परिवहन, स्वास्थ्य सेवा और लोगों के बीच संपर्क जैसे अनेक क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।