जम्मू कश्मीर के नेताओं ने 1931 के प्रदर्शन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 13-07-2026
Jammu and Kashmir leaders pay tribute to those killed in the 1931 protests
Jammu and Kashmir leaders pay tribute to those killed in the 1931 protests

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने 1931 में डोगरा महाराजा हरि सिंह के शासन के खिलाफ विरोध करते हुए अपना जीवन बलिदान करने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी।

नेकां के एक प्रवक्ता के अनुसार, नेताओं ने ‘शहीदों’ के बलिदान को जम्मू कश्मीर में न्याय, सम्मान और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष का एक अहम अध्याय बताया है।
 
पार्टी प्रवक्ता ने कहा, ‘‘13 जुलाई एक ऐतिहासिक मोड़ है जिसने उस समय की रियासत में तानाशाही, दमन और अन्याय के खिलाफ एक जन-आंदोलन की शुरुआत की थी।’’
 
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि प्रदर्शनकारियों का बलिदान न्याय, सच्चाई और शांति की खोज की दिशा में पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
 
उन्होंने कहा, ‘‘सम्मान की कभी न खत्म होने वाली चाहत को अन्याय से दबाया नहीं जा सकता। 13 जुलाई के शहीदों ने साबित कर दिया कि दृढ़ता और शांतिपूर्ण विरोध की भावना आखिरकार अत्याचार पर जीत हासिल करती है। मैं इन बहादुर लोगों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि देता हूं और खासकर युवाओं से अपील करता हूं कि वे हमारे सामूहिक संघर्ष के इतिहास से जुड़े रहें।’’
 
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा कि 13 जुलाई को दी गई कुर्बानियां हमेशा सम्मान, न्याय और मौलिक अधिकारों के लिए इंसानियत की अटूट कोशिश का प्रतीक बनी रहेंगी।
 
उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन महान शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने तानाशाही शासन को चुनौती देने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनके बलिदान ने एक ऐसा मोड़ ला दिया जिसने अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए पीढ़ियों को जागृत किया। 13 जुलाई की तारीख हमें हमेशा दमन के विरुद्ध एकता, करुणा और शांतिपूर्ण प्रतिरोध की अटूट शक्ति की याद दिलाती रहेगी।’’
 
नेकां सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए लोन ने पार्टी पर आरोप लगाया कि उसने इतिहास को महत्वहीन बना दिया है और शासन-कार्य के स्थान पर राजनीतिक तमाशे को प्राथमिकता दी है।