सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल मदरसा स्टाफ की याचिकाएं खारिज कीं

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 13-07-2026
SC dismisses batch of pleas of West Bengal Madrasah staff seeking recognition of appointments, salaries
SC dismisses batch of pleas of West Bengal Madrasah staff seeking recognition of appointments, salaries

 

नई दिल्ली
 
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 350 से ज़्यादा शिक्षकों और नॉन-टीचिंग कर्मचारियों की 40 से ज़्यादा रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन लोगों ने पश्चिम बंगाल के अलग-अलग मान्यता प्राप्त मदरसों में अपनी नियुक्ति का दावा किया था। इससे पहले, कलकत्ता हाई कोर्ट के एक सिंगल जज ने 'पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम, 2008' को असंवैधानिक घोषित किया था और बाद में हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच ने भी इस फैसले को सही ठहराया था।
 
याचिकाकर्ताओं का दावा था कि उनकी नियुक्ति रेगुलर तौर पर हुई थी और इसलिए वे राज्य सरकार की 'ग्रांट्स-इन-एड' (अनुदान) योजना के तहत वेतन पाने के हकदार थे। उन्होंने एक कमेटी के उस फैसले को भी चुनौती दी थी जिसमें उनके अलग-अलग दावों को खारिज कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2023 में कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के बाद हुई नियुक्तियों की जांच के लिए यह कमेटी बनाई थी। कमेटी ने आखिरकार उनके दावों को खारिज कर दिया था।
 
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने याचिकाकर्ताओं से सबसे अहम मामलों की पहचान करने को कहा और फिर कई प्रतिनिधि मामलों की जांच की। क्या कोर्ट ने इन मुद्दों की जांच की कि नियुक्ति के समय संबंधित मदरसों के पास वैध मान्यता थी या नहीं और क्या उनकी मैनेजिंग कमेटियां कानूनी रूप से गठित की गई थीं?
 
बेंच ने माना कि किसी भी प्रतिनिधि मामले में राहत का कोई आधार नहीं बनता है। इसलिए, बेंच ने कहा कि रिट याचिकाओं में कोई दम नहीं है और पूरी याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे सभी याचिकाकर्ताओं के दावे भी खारिज हो गए।