ईरान-अमेरिका युद्धविराम पर जमाअत ने शांति और जवाबदेही की मांग की

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 09-04-2026
Jamaat Demands Peace and Accountability Following Iran-US Ceasefire
Jamaat Demands Peace and Accountability Following Iran-US Ceasefire

 

नई दिल्ली:

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद (JIH) के अध्यक्ष सैयद सादतुल्लाह हुसैनी ने अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम का स्वागत करते हुए इसे एक जरूरी राहत बताया है। उन्होंने कहा कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका था और इससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई थी।

मीडिया को जारी बयान में हुसैनी ने कहा कि यह अस्थायी युद्धविराम निर्दोष लोगों के जान-माल के नुकसान को रोकने में मददगार साबित हुआ है। उन्होंने पिछले कुछ हफ्तों में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि इन हमलों से नागरिकों की मौत हुई और महत्वपूर्ण ढांचे को नुकसान पहुंचा, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत चिंता का विषय है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह युद्धविराम केवल एक अस्थायी विराम है, न कि स्थायी समाधान। उनके अनुसार, स्थायी और न्यायपूर्ण शांति के लिए जरूरी है कि सभी प्रकार की आक्रामकता पूरी तरह समाप्त हो, देशों की संप्रभुता का सम्मान किया जाए और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों के लिए जवाबदेही तय की जाए।

जमाअत अध्यक्ष ने कहा कि इस युद्धविराम से वैश्विक स्तर पर राहत की भावना बनी है, खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधा कम हुई है। इससे भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को राहत मिली है।

उन्होंने अमेरिका और इजरायल से अपील की कि वे तनाव को और न बढ़ाएं और गंभीर कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ें। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि यह युद्धविराम बेहद नाजुक है और इसमें शामिल पक्षों के अलग-अलग रुख के कारण स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है।

हुसैनी ने लेबनान में जारी इजरायली हमलों को भी तुरंत रोकने की मांग की और कहा कि किसी भी तरह का आंशिक या चयनात्मक युद्धविराम क्षेत्र में अस्थिरता को बढ़ा सकता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि हालिया घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि जटिल राजनीतिक विवादों का समाधान सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि संवाद और आपसी सम्मान से ही संभव है। अंत में, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जवाबदेही सुनिश्चित करने और भारत सरकार से शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।