जगतार सिंह हवारा को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली; अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 28-10-2026
Jagtar Singh Hawara gets no relief from High Court; next hearing on November 19
Jagtar Singh Hawara gets no relief from High Court; next hearing on November 19

 

चंडीगढ़ (पंजाब)
 
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बुधवार को जगतार सिंह हवारा की पैरोल याचिका पर सुनवाई की, लेकिन सुनवाई के दौरान कोई राहत नहीं दी। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को रजिस्ट्री में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। हालांकि, सुनवाई के दौरान कोई बहस नहीं हो सकी। इस मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी। जगतार सिंह हवारा जेल में हैं क्योंकि उन्हें 1995 में पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में दोषी ठहराया गया था।  हवारा को 21 सितंबर 1995 को गिरफ्तार किया गया था। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उन पर मुकदमा चला और उन्हें दोषी ठहराया गया। वे अपनी गिरफ्तारी के दिन से ही जेल में हैं; उन्हें जेल में बंद हुए 28 साल से अधिक समय हो चुका है। ट्रायल कोर्ट ने 27 मार्च 2007 के अपने आदेश में हवारा को दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई।
 
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने 12 अक्टूबर 2010 के अपने आदेश में इस सजा को बदलकर आजीवन कारावास (जीवन भर के लिए जेल) कर दिया। इससे पहले अगस्त में, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्यपाल से मुलाकात की थी। उन्होंने कैदी की मां की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए, मानवीय आधार पर जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल देने की सिफारिश की थी। मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि यह सिफारिश इसलिए की गई थी ताकि हवारा अपनी मां से मिल सकें, जिन्होंने उन्हें तीन दशकों से अधिक समय से नहीं देखा है।
 
हाल ही में जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने के संबंध में एक सिफारिश की गई थी, ताकि मानवीय आधार पर उन्हें पैरोल मिल सके, क्योंकि उनकी मां की तबीयत ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री मान ने कहा, "उनकी माँ की इच्छा है कि वे 31 साल बाद उनसे मिलें।" मुख्यमंत्री ने बताया कि चूँकि यह मामला केंद्र शासित प्रदेश में चल रहा है, इसलिए केंद्र सरकार तक यह अनुरोध पहुँचाने में राज्यपाल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा, "आज मैं राज्यपाल से मिला, क्योंकि यह मामला केंद्र शासित प्रदेश में चल रहा है, इसलिए इसमें राज्यपाल की अहम भूमिका होगी और इस मामले को केंद्र के पास भेजा जाएगा। अंतिम फैसला केंद्र को ही लेना है, लेकिन हमने 10 दिन की पैरोल का अनुरोध किया है।"