Indian Army's preparedness prevented the Galwan clash from escalating into a war: Brigadier Shekhawat
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
ब्रिगेडियर सौरभ सिंह शेखावत ने कहा कि भारतीय सेना की मजबूत तैयारियों ने यह सुनिश्चित किया कि 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सेना के साथ हुई हिंसक झड़प एक पूर्ण युद्ध में न तब्दील हो।
ब्रिगेडियर सेखावत गलवान संघर्ष के दौरान सेक्टर के कमांडर थे। उन्होंने सोमवार को तिरुवनंतपुरम में लोक भवन में आयोजित एक व्याख्यान के दौरान ये टिप्पणियां कीं।
लोक भवन की ओर से मंगलवार को जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, “ब्रिगेडियर सौरभ सिंह शेखावत ने कहा है कि 15 जून 2020 को गलवान में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प पूर्ण युद्ध में इसलिए नहीं बदली, क्योंकि भारतीय सेना ने मजबूत तैयारी कर रखी थी, जिसे दुश्मन सेना ने भी मान्यता दी।”
आतंकवाद विरोधी अभियानों, पर्वतारोहण और विशिष्ट सेवा में वीरतापूर्ण कार्यों के लिए कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित शेखावत ने कहा कि दुश्मन केवल “ताकत और बल की भाषा” समझता है। उन्होंने कहा कि एक बार जब इस ताकत का प्रदर्शन किया गया, तो तनाव कम हो गया।
गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प में एक भी गोली नहीं चली थी। दोनों देशों के सैनिकों ने झड़प में पत्थरों और लोहे की छड़ों का इस्तेमाल किया था।
ब्रिगेडियर शेखावत ने कहा कि खोपड़ी फोड़ दी गई और ऐसी स्थिति भी आई, जहां सैनिकों को बर्फ से ढकी नदियों में धकेल दिया गया और वे डूब गए। उन्होंने कहा कि यही “आमने-सामने की लड़ाई” का वास्तविक स्वरूप है।
ब्रिगेडियर शेखावत ने कहा, “सैनिकों को इस तरह की क्रूरता के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहना चाहिए, क्योंकि ऐसे प्रत्यक्ष टकराव फिर से होंगे। युद्धक्षेत्र इंस्टाग्राम, फेसबुक या तस्वीरों की दुनिया नहीं है। युद्धक्षेत्र बेहद क्रूर होता है।”
उन्होंने कहा कि गलवान में सैन्य झड़प के बाद की स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी, जिसमें बड़े बदलाव और सुधार लागू किए जा रहे थे, जबकि सभी मौसमों और परिस्थितियों में अटूट प्रतिबद्धता और अथक तीव्रता के साथ प्रशिक्षण जारी रहा।
ब्रिगेडियर शेखावत ने कहा, “बख्तरबंद वाहन, टैंक, नये शामिल किए गए वाहन, घोड़े और विमान-हर संभव साधन का इस्तेमाल किया गया। सीमा पर हथियारों और उपकरणों को उन्नत और मजबूत किया गया।”
उन्होंने कहा कि वहां का इलाका और मौसम दुश्मन से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण था।
ब्रिगेडियर शेखावत ने कहा कि शुरुआत में उनके अपने चीनी समकक्ष के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण थे और इस दौरान “आक्रामक गश्त, शक्ति प्रदर्शन और छोटी-मोटी झड़पें” जारी थीं, लेकिन दोनों पक्षों के एक-दूसरे की तैयारियों और ताकत का आकलन के बाद स्थिति शांत हो गई।