अध्ययन: भारत दक्षिण-पूर्व एशिया की 90 अरब डॉलर की एग्रीटेक विकास क्षमता को खोलेगा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 03-04-2026
India to unlock Southeast Asia's USD 90 billion AgriTech growth potential: Study
India to unlock Southeast Asia's USD 90 billion AgriTech growth potential: Study

 

नई दिल्ली 
 
Omnivore, Beanstalk AgTech और Briter द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया में डिजिटलीकरण और AgriTech को अपनाने से 2033 तक सालाना GDP में भारी $90 बिलियन का लाभ हो सकता है, जिसमें भारत सबसे आगे रहेगा। यह अध्ययन तर्क देता है कि डिजिटलीकरण और इसके बढ़ते उपयोग से 2033 तक GDP में यह सालाना लाभ मिल सकता है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि यह क्षेत्र वर्तमान में बाज़ार में आई भारी गिरावट (market correction) का सामना कैसे कर रहा है। 
 
दक्षिण-पूर्व एशिया में AgriTech में निवेश 2022 में अपने चरम पर था, जो $750 मिलियन से अधिक था, लेकिन 2025 तक इसमें लगभग 70 प्रतिशत की गिरावट आ गई। यह गिरावट उस दौर को दर्शाती है जब निवेशकों ने खंडित मूल्य श्रृंखलाओं (fragmented value chains) की संरचनात्मक वास्तविकताओं और दक्षिण एशियाई बाज़ारों की विविधता के बीच अपने उद्यमों का विस्तार करने में आने वाली कठिनाइयों का पुनर्मूल्यांकन करना शुरू कर दिया था। कृषि इस क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है, जो GDP में लगभग 15 प्रतिशत का योगदान देता है और कुल कार्यबल के 40 प्रतिशत लोगों को रोज़गार प्रदान करता है। यह अध्ययन चार विशिष्ट क्षेत्रों (verticals) की पहचान करता है जिनमें सबसे अधिक विश्वसनीय गति दिखाई दे रही है: डिजिटल मूल्य श्रृंखलाएं, समावेशी AgriFinTech, कृषि-खाद्य जीवन विज्ञान और टिकाऊ उपभोक्ता ब्रांड।
 
Omnivore के मैनेजिंग पार्टनर मार्क कान ने कहा, "हमने भारतीय AgriTech में निवेश करते हुए एक दशक से अधिक समय बिताया है। हमने देखा है कि शासन-प्रशासन, बाहर निकलने के अवसरों (exit opportunities) और बाज़ार के बुनियादी ढांचे को बनाने की कड़ी मेहनत के ज़रिए यह पूरा तंत्र (ecosystem) कैसे परिपक्व हुआ है।" कान ने आगे कहा, "दक्षिण-पूर्व एशिया में AgriTech का परिदृश्य भी इसी तरह की यात्रा से गुज़र रहा है, और भारत का अनुभव इसके लिए एक सच्चा रोडमैप प्रदान करता है। बाज़ार का खंडित होना एक वास्तविकता है, लेकिन साथ ही इस पूरे क्षेत्र में कृषि उत्पादन और किसान समुदायों को ऊपर उठाने का अवसर भी उतना ही वास्तविक है। धैर्यपूर्ण और अनुशासित पूंजी, जो स्थानीय बाज़ार की गतिशीलता को समझती हो, वही इन तंत्रों को आगे बढ़ाती है।"
 
इस अध्ययन के निष्कर्ष उन कई मान्यताओं को चुनौती देते हैं जिन्होंने इस क्षेत्र में निवेश को आकार दिया है। अध्ययन में बताया गया है कि सीमा-पार विस्तार के दो-तिहाई प्रयास असफल रहे हैं। वर्तमान में सबसे अधिक सुरक्षित और सफल अवसर वे हैं जो किसी एक ही बाज़ार पर केंद्रित होते हैं और स्थानीय निष्पादन टीमों (local execution teams) के इर्द-गिर्द बुने जाते हैं।
 
अध्ययन में कहा गया है, "2022 और 2025 के बीच असफल हुए 60% से अधिक उद्यमों के पतन का कारण समय से पहले किया गया क्षेत्रीय विस्तार बताया गया है।" "बाहर निकलने के अवसरों (exits) की बात करें तो, 2020 के बाद से इस पूरे तंत्र में तरलता से जुड़े लगभग 75% मामलों में कॉर्पोरेट अधिग्रहण (corporate acquisitions) की भूमिका रही है, जबकि इसी अवधि में केवल आठ IPO ही पूरे हो पाए हैं।" इस स्टडी में सुझाव दिया गया है कि दक्षिण-पूर्व एशिया को भारत के BSE SME और NSE Emerge प्लेटफ़ॉर्म पर ध्यान देना चाहिए। ग्रोथ-स्टेज वाले वेंचर्स के लिए लिस्टिंग के ये खास रास्ते पारंपरिक IPO की सीमा से नीचे काम करते हैं और क्षेत्रीय स्टार्टअप्स के लिए एक ज़रूरी एग्ज़िट का रास्ता दे सकते हैं।
 
स्टडी में बताया गया है, "DFI और इम्पैक्ट इन्वेस्टर्स ने पूरे क्षेत्र में एग्रीफ़ूड फ़ंड्स के लिए कुल मिलाकर 650 मिलियन USD देने का वादा किया है और वे कैपिटल स्टैक के लिए ज़रूरी बने हुए हैं।" लेखकों के अनुसार, स्केलिंग के अगले चरण में इक्विटी, क्रेडिट और रियायती कैपिटल को मिलाने की ज़रूरत होगी।