भारत ने यूएन में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा: ISIS और अल-कायदा के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करें

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 05-03-2026
India tells international community at UN: Take joint action against ISIS and al-Qaeda
India tells international community at UN: Take joint action against ISIS and al-Qaeda

 

नई दिल्ली

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि ISIS, अल-कायदा और उनके प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई की जाए। भारत ने आतंकवाद को “अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए अस्तित्वगत खतरा” बताया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के फर्स्ट सेक्रेटरी रघु पुरी ने बुधवार को कहा, “आतंकवाद किसी सीमा, राष्ट्रीयता या जाति को नहीं जानता। यह एक चुनौती है, जिसका मुकाबला अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर करना होगा।”

पुरी ने अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का भी जिक्र किया। यह हमला पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ ने किया था। इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी।

पुरी ने कहा, “हमें ISIS और अल-कायदा और उनके प्रॉक्सी के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करनी होगी। भारत पिछले लगभग तीन दशकों से सीमापार आतंकवाद का शिकार रहा है और हम इसके मानविक और सामाजिक-आर्थिक नुकसान को अच्छे से समझते हैं।”

भारत ने वैश्विक आतंकवाद विरोधी रणनीति (Global Counter Terrorism Strategy – GCTS) को बहुपक्षीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण उपकरण बताते हुए इसका समर्थन भी किया। पुरी ने कहा कि भारत GCTS के नौवें पुनरीक्षण की प्रक्रियाओं में पूरी तरह सहयोग करेगा और सह-फैसिलिटेटर्स फिनलैंड और मोरक्को के साथ मिलकर काम करेगा।

पुरी ने 2022 में भारत के काउंटर टेररिज्म कमिटी की अध्यक्षता का भी जिक्र किया और कहा कि भारत ने इस अवधि में आतंकवाद-विरोधी सिद्धांतों को यूएन की संरचना और बहस में शामिल करने का प्रयास किया। उन्होंने ‘दिल्ली घोषणा’ का हवाला भी दिया, जो नई और उभरती तकनीकों के आतंकवादी उपयोग के खिलाफ कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

पुरी ने कहा, “हमारी पहलें न्यूयॉर्क और विश्व स्तर पर हमारे प्रतिबद्धता की गवाही देती हैं। भारत यूएन के विभिन्न निकायों के साथ मिलकर क्षमता निर्माण और अपने साझेदारों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का काम करता रहेगा।”

इस प्रयास के तहत 2022 में सुरक्षा परिषद के काउंटर-टेररिज्म कमिटी ने नई और उभरती तकनीकों के आतंकवादी उपयोग के मुद्दे पर विशेष बैठकें दिल्ली और मुंबई में आयोजित की थीं। इन बैठकों के परिणामस्वरूप ‘दिल्ली घोषणा’ को अपनाया गया।

भारत का मानना है कि आतंकवाद के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा रणनीति ही सबसे प्रभावी उपाय हैं।